एक तस्वीर ग़म और ख़ुशी की !

9 सितम्बर को उपराष्ट्रपति के चुनाव में अपना वोट डालने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पंजाब और हिमाचल प्रदेश बाढ़ की त्रासदी और प्राकृतिक आपदाग्रस्त लोगों की जानकारी लेने गुरदासपुर तथा शिमला पहुंचे। इससे पूर्व श्री मोदी ने बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का हवाई सर्वे किया। जापान-चीन की यात्रा से लौटने के फौरन बाद प्रधानमंत्री ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से बात की और केन्द्र से 12,000 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद भेजी। 9 सितंबर को श्री मोदी ने पंजाब के लिए 1,600 करोड़ रुपये और हिमाचल प्रदेश के लिए 1,500 करोड़ रुपये बाढ़ राहत सहायता की घोषणा की। उन्होंने आश्वस्त किया कि समीक्षा के पश्चात केन्द्र दोनों राज्यों को भविष्य में भी आर्थिक सहायता प्रदान करेगा। दोनों राज्यों में गैर-भाजपाई सरकारें हैं किन्तु रोज सैकड़ों गाली खाने तथा तख्ता पलटने की साजिशों के बीच मोदी राजधर्म निभाह रहे हैं, यह उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और देश के प्रति उनके समपर्ण भाव का द्योतक है।
श्री मोदी के हिमाचल दौरे के बीच एक विशेष घटना घटी। ज्ञातव्य है कि 30 जून को हिमाचल के मंडी जिले के तलवाड़ा गांव में बादल फटने से जल-प्रलय जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। गांव का रमेश कुमार अचानक आये पानी में बह गया। उसे देखने गई पत्नी राधा देवी भी बह गई। बेटे-बहू को बचाने के प्रयास में रमेश की माँ पूर्णा देवी भी बाढ़ के पानी में बह गई। घर में सिर्फ रमेश-राधा की निशानी 11 महीने की नन्ही बालिका ही बची थी। रमेश के पड़ोसी प्रेम सिंह ने नन्ही नीतिका को बचा लिया और बाद में रमेश के चचेरे भाई बलवन्त को सौंप दिया।
जब प्रधानमंत्री शिमला पहुंचे तो तलवाड़ा गांव के लोग नीतिका के साथ उनसे मिलने शिमला पहुंचे और नीतिका के पिता, माता व दादी के बाढ़ में बह जाने की दुःखद कहानी तथा नीतिका के बचे रहने के चमत्कार की घटना से श्री मोदी को अवगत कराया। प्रधानमंत्री ने झट से नीतिका को गोदी में लेकर दुलारा। उनके चेहरे पर ख़ुशी और ग़म दोनों के भाव हैं। चित्र के इन भावुक क्षणों को कोई संगदिल नहीं पढ़ सकता। नीतिका को निहारती ये नज़रें कह रही हैं कि नीतिका तुम कितनी भाग्यशाली हो कि बाढ़ के थपेड़े तुम्हें लील नहीं पाये! और कितनी अभागी हो कि तुम्हारे सिर से माता-पिता का साया उठ गया। नियति ने तुम्हें जिन्दगी की कंटीली राहों पर अकेला चलने को छोड़ दिया। नीतिका को निहारती निगाहों में आशीर्वाद है- जिसने तुम्हें बचाया है वही तुम्हें समाज के भूखे भेड़ियों से बचा कर रखेगा और आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करेगा ! यह तस्वीर बहुत कुछ कह रही है। विवेकशून्य, पाषाण हृदय गर्हित मनोवृत्ति के लोग इसके मर्म को नहीं समझ पायेंगे।
गोविंद वर्मा
संपादक 'देहात'
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