नेतन्याहू का दावा: हमने अमेरिका को युद्ध में नहीं घसीटा, ईरान परमाणु-मिसाइल क्षमता लगभग खत्म

अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को अब तीन हफ्ते हो चुके हैं। युद्ध और तेज़ हो रहा है और अब इसका निशाना तेल और गैस के प्रमुख ठिकाने बन गए हैं। हाल ही में इजराइल ने ईरान के सबसे बड़े गैस प्लांट साउथ पार्स पर हमला किया, जबकि ईरान ने इसके जवाब में कुवैत, सऊदी अरब और UAE में ड्रोन से गैस प्लांट पर हमले किए।
इस घटनाक्रम ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में उथल-पुथल मचा दी और कच्चे तेल और गैस के दाम तेजी से बढ़ गए। शेयर बाजारों में भी गिरावट देखी गई और दुनिया के कई राष्ट्राध्यक्ष आपस में बातचीत करने लगे।
अमेरिका और इजराइल की रणनीति पर बहस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें इजराइल के इस हमले की जानकारी नहीं थी और उन्होंने इजराइल से अनुरोध किया कि अब ऊर्जा ठिकानों पर हमले न किए जाएं। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी कहा कि इजराइल ने ईरान के गैस क्षेत्र पर अकेले कार्रवाई की थी और आगे ऐसा नहीं होगा।
हालांकि, हाल के घटनाक्रमों से पता चला है कि ट्रंप ने ईरान पर हमलों को लेकर कई बार भ्रामक बयान दिए। अमेरिकी इंटेलिजेंस प्रमुख तुलसी गबार्ड ने बताया कि अमेरिका और इजराइल के हमलों का उद्देश्य ईरान के नेताओं को मारना नहीं बल्कि बैलिस्टिक मिसाइल और नेवी ठिकानों को निशाना बनाना था।
साउथ पार्स पर हमले का असर
दुनिया के तेल के लगभग 5% परिवहन होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते से होता है। इस मार्ग पर रुकावट और साउथ पार्स पर इजराइल के हमले से वैश्विक तेल संकट गहराया है। ब्रेंट क्रूड का मूल्य 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो युद्ध शुरू होने के बाद से 60% से ज्यादा की बढ़ोतरी है।
ईरान के उत्तर-पड़ोसी देश भी इस संघर्ष में सीधे शामिल होने का खतरा बढ़ गया है।
वैश्विक नेताओं की प्रतिक्रियाएँ
इस हमले के बाद दुनिया के कई देश सक्रिय हो गए। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कतर, जॉर्डन, फ्रांस, मलेशिया और ओमान के नेताओं से बातचीत की। उन्होंने विशेष रूप से पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया।
भारत का रुख
विदेश मंत्रालय (MEA) ने खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा ठिकानों पर हमलों को बेहद चिंताजनक बताया। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत इन हमलों को स्वीकार नहीं करता और ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना न बनाने की अपील दोहराई। उन्होंने चेताया कि इस तरह के हमलों से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक स्थिति और बिगड़ सकती है।
ईरान की जवाबी कार्रवाई
ईरान ने साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर हुए इजराइल हमले के बाद रास लफान LNG रिफाइनरी सहित अन्य ऊर्जा सुविधाओं पर हमला किया। इन हमलों के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें 10% से अधिक बढ़कर 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं।
अमेरिका के दावे और वास्तविकता
अमेरिका ने ईरान पर हमलों का औचित्य यह बताते हुए पेश किया कि ईरान परमाणु हथियार विकसित कर रहा था। हालांकि, अमेरिकी इंटेलिजेंस प्रमुख तुलसी गबार्ड ने बताया कि जून 2025 में अमेरिका के हमलों में ईरान का न्यूक्लियर एनरिचमेंट प्रोग्राम पूरी तरह नष्ट कर दिया गया था।
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