20 साल में बिहार में युवा और शिक्षा का विकास नहीं हुआ: राहुल गांधी

पूर्णिया। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को पूर्णिया के कसबा विधानसभा क्षेत्र में आयोजित जनसभा में बिहार की वर्तमान सरकार पर तीखी आलोचना की। उन्होंने राज्य की शिक्षा, स्वास्थ्य और युवाओं की स्थिति पर सवाल उठाते हुए महागठबंधन के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर निर्णायक जीत का आह्वान किया।
सभा का सबसे भावुक क्षण तब आया जब महागठबंधन के कसबा उम्मीदवार मोहम्मद इरफान आलम मंच पर भावुक हो गए। राहुल गांधी ने उन्हें तुरंत ढांढस बंधाया और कहा, “आप MLA के बेटे नहीं हैं, लेकिन आपके संघर्ष पर हमें गर्व है। यह चुनाव आपका नहीं, बल्कि बिहार के हर युवा और गरीब का है।” राहुल ने इरफान आलम के माध्यम से आम लोगों के संघर्ष और सादगी को सम्मानित करने का प्रयास किया।
राहुल गांधी ने बिहार की मूलभूत समस्याओं को उजागर करते हुए ‘इंडिया गठबंधन’ की सरकार बनने पर सुधारों का वादा किया। उन्होंने पूर्णिया सदर से कांग्रेस प्रत्याशी जितेंद्र कुमार और कसबा से इरफान आलम के पक्ष में वोट देने की अपील की। उन्होंने ऐलान किया कि केंद्र में इंडिया गठबंधन की सरकार बनने पर बिहार में देश का सबसे बड़ा और विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय स्थापित किया जाएगा, जिससे युवाओं को शिक्षा के लिए राज्य छोड़ने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
उन्होंने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की दुर्दशा पर चिंता जताते हुए कहा कि बिहार के अस्पतालों में लोग जीने नहीं, बल्कि मरने आते हैं। राहुल गांधी ने वोट चोरी और लोकतंत्र पर हमले का आरोप लगाते हुए केंद्र और राज्य की सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बिहार में 20 साल से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं, लेकिन राज्य के युवाओं के लिए कोई ठोस विकास नहीं हुआ। उद्योगों के लिए जमीन नहीं है, लेकिन बड़े समूहों के लिए जमीन उपलब्ध कराई गई।
राहुल गांधी ने युवाओं से सवाल किया कि उन्होंने विदेशों में काम करके और दुबई जैसी जगहों को विकसित करके दिखाया, तो बिहार में क्यों नहीं कर सकते। उन्होंने बिहार की ऐतिहासिक नालंदा यूनिवर्सिटी का उदाहरण देते हुए कहा कि आज यहां शिक्षा की स्थिति बेहद कमजोर है और परीक्षाओं में पेपर लीक जैसी घटनाएं आम हैं।
राहुल गांधी ने कहा, “नीतीश कुमार कहते हैं कि 20 साल में बिहार बदल गया, लेकिन क्या यहां अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य मिल रहा है? बिहार में अस्पतालों में लोग जीने नहीं, मरने आते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के हाथ में राज्य की सत्ता का नियंत्रण है और सरकार अमित शाह और मोदी के दिशा-निर्देशन में चल रही है। बिहार के विकास के लिए बदलाव जरूरी है।”
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