दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर धंसाव को लेकर राकेश टिकैत का तंज, बोले- निर्माण गुणवत्ता से हुआ समझौता

HIGHLIGHTS
- मुजफ्फरनगर: मानसून की पहली ही तेज बारिश के बाद दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की हालत को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
- कई हिस्सों में सड़क धंसने और गहरे गड्ढे बनने के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिससे इस हाई-प्रोफाइल परियोजना की गुणवत्ता पर बहस छिड़ गई है।
- करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस एक्सप्रेसवे पर हुए नुकसान को लेकर लोगों में नाराजगी देखी जा रही है।
- शुरुआती बारिश में ही सड़क की यह स्थिति सामने आने के बाद निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे है…
मुजफ्फरनगर: मानसून की पहली ही तेज बारिश के बाद दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की हालत को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। कई हिस्सों में सड़क धंसने और गहरे गड्ढे बनने के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिससे इस हाई-प्रोफाइल परियोजना की गुणवत्ता पर बहस छिड़ गई है।
करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस एक्सप्रेसवे पर हुए नुकसान को लेकर लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। शुरुआती बारिश में ही सड़क की यह स्थिति सामने आने के बाद निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने भी इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सीधे तौर पर निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि यह लापरवाही और जल्दबाजी में किए गए काम का नतीजा है, जो पहली ही बारिश में उजागर हो गया।
टिकैत ने कहा कि बड़े प्रोजेक्ट्स में अक्सर गुणवत्ता से समझौता किया जाता है। सड़क निर्माण के दौरान जिस तरह की मजबूत मिट्टी, लेयरिंग और उचित कम्पेक्शन की आवश्यकता होती है, कई बार उसका पालन नहीं किया जाता। इसी कारण बारिश का पानी सड़क की संरचना को कमजोर कर देता है और धंसाव शुरू हो जाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि समय सीमा के दबाव में निर्माण कार्य तेजी से पूरा करने की कोशिश की जाती है, जिससे गुणवत्ता प्रभावित होती है। टिकैत ने सवाल उठाया कि इस एक्सप्रेसवे में किस तरह की सामग्री का उपयोग किया गया और क्या तय मानकों का पालन किया गया।

किसान नेता के अनुसार, यदि सड़क के नीचे कमजोर या रेतीली मिट्टी का उपयोग हुआ है तो भारी बारिश में उसका असर तुरंत दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण की हर परत को वैज्ञानिक तरीके से मजबूत करना जरूरी होता है, लेकिन कई परियोजनाओं में इस पर गंभीरता नहीं दिखाई जाती।
उन्होंने मांग की कि इस पूरे निर्माण कार्य की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मानकों का पालन हुआ है या नहीं। टिकैत ने कहा कि जनता के पैसे से बनने वाली बड़ी परियोजनाओं में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।
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