राजद के कार्यकारी अध्यक्ष बनते ही बोले तेजस्वी- नीतीश के धोखे से मोदी बने पीएम

पटना। राजद में अब तक तेजस्वी यादव के फैसले अनौपचारिक रूप से लागू होते थे, लेकिन रविवार को पार्टी ने उन्हें औपचारिक रूप से कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया। यह निर्णय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की पटना में हुई बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद ने की। प्रस्ताव पार्टी महासचिव भोला यादव ने पेश किया, जिसे कार्यकारिणी ने सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया।
गत वर्ष 18 जनवरी को राष्ट्रीय परिषद ने राजद के संविधान में संशोधन कर तेजस्वी को नाम और अधिकारों में लालू के समान दर्जा दे दिया था। अब इस औपचारिक मनोनयन के बाद उनका कार्यकारी अध्यक्ष का दर्जा पक्का हो गया है।
राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में बिहार सहित 27 राज्यों के लगभग 250 प्रतिनिधि मौजूद थे। राबड़ी देवी की उपस्थिति में लालू ने तेजस्वी को प्रमाण-पत्र सौंपा और उनकी कार्यक्षमता की सराहना की। तेजस्वी ने विपरीत परिस्थितियों में भी समझौता न करने की प्रतिबद्धता जताई और राजद को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा दिलाने का संकल्प व्यक्त किया।
बैठक में राजनीतिक प्रस्ताव भी पास किया गया, जिसमें एनडीए पर देश की बहुरंगी और बहुधर्मी छवि को धूमिल करने के आरोप लगाए गए और वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई। तय हुआ कि बजट सत्र के बाद तेजस्वी पूरे बिहार का भ्रमण कर बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करेंगे और अन्य राज्यों में भी राजद का दायरा बढ़ाएंगे।
तेजस्वी के नेतृत्व में एक वरीय नेताओं की समिति बनाई जाएगी, जो विभिन्न प्रदेशों में संगठन को निचले स्तर तक मजबूत करेगी। इसके साथ ही उन राज्यों में चुनाव लड़े जाएंगे, जहां पार्टी की जीत या बेहतर प्रदर्शन की संभावना है। अन्य राजनीतिक दलों के साथ साझा संघर्ष के लिए भी प्रयास होंगे।
बैठक में संगठन, रणनीति और राजनीतिक दिशा पर चर्चा हुई। तय हुआ कि ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से मतदान की मांग के लिए आंदोलन छेड़ा जाएगा, और विपक्षी दलों का समर्थन लिया जाएगा। प्रस्ताव में रोजगार की कानूनी गारंटी, न्यूनतम समर्थन मूल्य का कानूनी दर्जा, किसानों की कर्ज माफी, शिक्षा और स्वास्थ्य में सार्वजनिक निवेश, निजी क्षेत्र में आरक्षण और धन के न्यायपूर्ण पुनर्वितरण की नीति को भी शामिल किया गया।
तेजस्वी ने कहा कि राजद के लिए पहले भी अनेक बाधाएं आईं, लेकिन पार्टी को 1.90 करोड़ वोट मिले, जो अब तक के इतिहास में सबसे बड़ा आंकड़ा है। उन्होंने पार्टी को राष्ट्रीय मान्यता दिलाने का संकल्प दोहराया और कहा कि उम्मीदवार चयन में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इसे सार्वजनिक बहस का विषय नहीं बनाया जाएगा।
बैठक का संचालन प्रदेश के प्रधान महासचिव रणविजय साहू और प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने किया। राष्ट्रीय महासचिव जय प्रकाश नारायण यादव ने पिछली बैठक की रिपोर्ट प्रस्तुत की। प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल ने प्रतिनिधियों का स्वागत किया और मृतक नेताओं के लिए शोक प्रस्ताव पेश किया गया।
राजनीतिक प्रस्ताव में लोकतंत्र, संविधान, सामाजिक न्याय, राष्ट्रीय एकता, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की सुरक्षा और निजी क्षेत्र में आरक्षण जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया। इस बैठक ने राजद के लिए संगठनात्मक मजबूती और राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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