बागपत। बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री सोमवार को बड़ौत पहुंचे। उन्होंने कहा कि यूजीसी एक्ट केवल एक नियोजित साजिश है, जिसका उद्देश्य अगले साल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को प्रभावित करना है।
बड़ौत में नीरज वत्स के आवास पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए अग्निहोत्री ने कहा कि वे दो-तीन दिन में योजना बनाकर शंकराचार्य से मिलने जाएंगे। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल शंकराचार्य की ओर से किसी भी पद को स्वीकार करने का उनका कोई इरादा नहीं है।
अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि जो लोग भाजपा का विरोध करते हैं, उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और आयकर विभाग जैसी एजेंसियों के माध्यम से परेशान किया जाता है, जबकि सरकार के समर्थक लोग सुरक्षित रहते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार से उन्होंने यूजीसी एक्ट को वापस लेने की मांग की थी, लेकिन 26 जनवरी तक कोई कार्रवाई न होने पर उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस कदम को समर्थन देते हुए लगभग 1400 संगठनों ने आवाज उठाई।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सात दिनों के भीतर विशेष संसदीय सत्र में इस मुद्दे पर कोई निर्णय नहीं लिया गया, तो वे आंदोलन की राह अपनाकर दिल्ली की ओर कूच करेंगे।
इस अवसर पर भाजपा नेता दीपक शर्मा ने चंद्रशेखर आजाद का उदाहरण देते हुए कहा कि अधिकारियों द्वारा रैलियों और आंदोलनों को रोकने की कार्रवाई आम है। उन्होंने दावा किया कि 95 प्रतिशत शिकायतें फर्जी होती हैं, जिनके कारण ब्राह्मण, क्षत्रिय, कायस्थ, वैश्य, भूमिहार और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोग प्रताड़ित होते हैं और उनसे पैसों की वसूली होती है।
अलग कारणों से दिया इस्तीफा
अग्निहोत्री ने बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा दिया क्योंकि वे नए यूजीसी नियमों और सरकारी नीतियों से असहमत थे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में लंबे समय से ब्राह्मण विरोधी अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें जेल में डिप्टी जेलर ने ब्राह्मणों को प्रताड़ित किया और अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज के शिष्यों के साथ मारपीट हुई। उनका दूसरा प्रमुख मुद्दा यूजीसी 2026 नियम है।