नई दिल्ली। उन्नाव प्रकरण से जुड़े एक मामले में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए सजा पर रोक लगाने से भी इनकार कर दिया। इसके साथ ही अदालत ने मामले की सुनवाई में तेजी लाने का निर्देश दिया है और दिल्ली हाईकोर्ट से कहा है कि सेंगर की अपील पर तीन महीने के भीतर फैसला सुनाया जाए।

पूर्व विधायक ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि उन्हें निचली अदालत से 10 वर्ष की सजा सुनाई गई थी, जिसमें से वह सात साल से अधिक की अवधि जेल में काट चुके हैं। उनके वकील ने रिमिशन जोड़ते हुए दावा किया कि सेंगर करीब 9 साल 7 महीने की सजा पूरी कर चुके हैं। यह भी कहा गया कि हाईकोर्ट में अपील लंबित होने के कारण उन्हें जमानत का लाभ मिलना चाहिए।

हालांकि अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। यह मामला पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में हुई मौत से जुड़ा है, जिसमें निचली अदालत ने कुलदीप सिंह सेंगर को दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा सुनाई थी। इससे पहले 19 जनवरी को दिल्ली हाईकोर्ट भी इस मामले में सेंगर को जमानत देने से मना कर चुका है। हाईकोर्ट के उसी आदेश को चुनौती देते हुए सेंगर ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

गौरतलब है कि रेप मामले में हाईकोर्ट से मिली जमानत पर पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा रखी है। वहीं, पीड़िता की ओर से सजा बढ़ाने की मांग वाली अपील भी अदालत में लंबित है।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कहा कि सजा का निलंबन कोई अधिकार नहीं, बल्कि यह अदालत के विवेक पर निर्भर करता है। उन्होंने सेंगर के आपराधिक रिकॉर्ड और नैतिक अधमता से जुड़े अपराध में दोषसिद्धि का उल्लेख करते हुए राहत देने से इनकार किया।

मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि न्याय प्रणाली निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांत पर काम करती है और अदालतों पर भरोसा रखा जाना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में हर व्यक्ति को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार मिला है, चाहे आरोप कितने भी गंभीर क्यों न हों। सेंगर की अपील पर सुनवाई की तारीख 11 फरवरी तय की गई है।