बागपत। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मंडल उपाध्यक्ष सुमित शर्मा ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों के खिलाफ अपने विरोध के चलते पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर केंद्र सरकार के फैसले पर गहरी नाराजगी जताई और स्पष्ट किया कि जब तक यूजीसी कानून वापस नहीं लिया जाएगा, उनका विरोध जारी रहेगा और वे भाजपा का बहिष्कार करेंगे।
यूजीसी कानून के खिलाफ आंदोलन का ऐलान
सुमित शर्मा ने कहा कि वे नए यूजीसी नियमों के विरोध में लगातार आंदोलन करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार द्वारा कानून को वापस लिए बिना उनका बहिष्कार जारी रहेगा। यह कदम भाजपा के भीतर असंतोष की झलक दिखाता है, खासकर ऐसे फैसलों के खिलाफ जो शिक्षा क्षेत्र को प्रभावित करते हैं।
नजरबंदी पर कड़ा ऐतराज
इस्तीफे के एक अन्य कारण के रूप में सुमित शर्मा ने ब्राह्मण समाज के एक प्रमुख नेता की नजरबंदी पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाई अस्वीकार्य है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगाने का प्रयास है।
भाजपा के लिए बढ़ती चुनौती
सुमित शर्मा का इस्तीफा और उनके सार्वजनिक बयानों ने भाजपा के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। यह घटना पार्टी के भीतर केंद्र सरकार के कुछ निर्णयों को लेकर असहमति को उजागर करती है। खासकर यूजीसी नियम और किसी समुदाय के नेता की नजरबंदी जैसे मुद्दों पर विरोध पार्टी की राजनीतिक छवि पर असर डाल सकता है। सुमित शर्मा के कदम के बाद क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियों में भी बढ़ोतरी होने की संभावना है।