बंगाली सिनेमा और टीवी जगत में पर्णो मित्रा का नाम कोई नया नहीं है। अपनी सरलता, दमदार अभिनय और अनोखे किरदारों के लिए जानी जाने वाली पर्णो ने छोटे पर्दे से लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्मों तक अपनी अलग पहचान बनाई है। हाल ही में वह फिर सुर्खियों में हैं, हालांकि इस बार राजनीतिक कारणों से। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी को अलविदा कहकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) का दामन थाम लिया है। लेकिन यहां हम उनके राजनीतिक सफर की बजाय उनके अभिनय और जीवन की कहानी पर नजर डालते हैं।

जन्म और शुरुआती जीवन
पर्णो मित्रा का जन्म 31 अक्टूबर 1985 को कोलकाता में हुआ। उनके पिता की नौकरी अरुणाचल प्रदेश में थी, इसलिए उनका बचपन वहीं बीता। पढ़ाई के लिए उन्होंने डॉव हिल स्कूल, कुर्सियांग (दार्जिलिंग) और बाद में प्रैट मेमोरियल स्कूल, कोलकाता से शिक्षा प्राप्त की। बचपन से ही उन्हें कला और अभिनय में गहरी रुचि थी।

टीवी से मिली पहचान
पर्णो ने अपने करियर की शुरुआत 2007 में लोकप्रिय बंगाली टीवी सीरियल ‘खेला’ से की। इस धारावाहिक में उनके अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा और यहीं से उन्हें व्यापक पहचान मिली। इसके बाद वह ‘मोहोना’, ‘शोमॉय’, ‘बौ कथा काओ’ जैसे सीरियल्स में नजर आईं। ‘मोहोना’ में उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड भी मिला।

फिल्मों में सफलता का पहला बड़ा कदम
पर्णो के करियर का बड़ा मोड़ 2011 में आया, जब उन्होंने निर्देशक अंजन दत्त की फिल्म ‘रंजना आमी आर आशबो ना’ में अभिनय किया। इस फिल्म ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर तारीफ बटोरी, बल्कि इसे तीन राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिले। फिल्म में उनके किरदार ‘रंजना’ ने उन्हें बंगाली सिनेमा की प्रतिष्ठित अभिनेत्रियों में शामिल कर दिया।

इसके बाद पर्णो ने ‘बेडरूम’, ‘आमी आर आमार गर्लफ्रेंड्स’, ‘एकला आकाश’, ‘ग्लैमर’, ‘राजकाहिनी’ जैसी चर्चित फिल्मों में काम किया। उन्होंने कमर्शियल के साथ-साथ कंटेंट-फोकस्ड फिल्मों में भी अपनी पकड़ बनाई।

इरफान खान के साथ अंतरराष्ट्रीय फिल्म
2017 में पर्णो को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली, जब वह इंडो-बांग्लादेशी फिल्म ‘डूब’ में दिखाई दीं। इस फिल्म में उन्होंने दिवंगत अभिनेता इरफान खान के साथ काम किया। मोस्तफा सरवर फारूकी के निर्देशन में बनी यह फिल्म रिश्तों, प्यार और अकेलेपन जैसे जटिल विषयों को दर्शाती है। पर्णो के अभिनय की आलोचकों ने भी जमकर सराहना की।

आज भी सक्रिय
पर्णो सिर्फ फिल्मों और टीवी तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने वेब सीरीज और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी काम किया है। हाल के वर्षों में वह नए जमाने के कंटेंट और अनोखे किरदारों में प्रयोग करती रही हैं। यही कारण है कि वह आज भी बंगाली मनोरंजन उद्योग में एक सम्मानित और प्रासंगिक चेहरा बनी हुई हैं।