नई दिल्ली। ईरान और इस्राइल-अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष का असर भारत में आम हवाई यात्रियों की जेब पर साफ दिख रहा है। खाड़ी क्षेत्र के ऊपर से गुजरने वाले हवाई मार्गों पर अस्थायी बंदी और एयरस्पेस में बाधाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन काफी प्रभावित हुआ है।
सोमवार को स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि लंदन से मुंबई आने वाले टिकट कुछ एयरलाइंस में प्रति यात्री 9 लाख रुपये तक बिकते दिखे। सामान्यतः इकॉनमी क्लास का किराया 20–50 हजार रुपये होता है, लेकिन अब यह 2.9 लाख रुपये तक पहुंच गया। वहीं, बिजनेस क्लास की टिकटें 1.2–2.5 लाख रुपये से बढ़कर 9 लाख रुपये तक पहुंच गईं।
किराये में इतनी बढ़ोतरी क्यों?
एयरलाइन कंपनियों का कहना है कि मुख्य वजह मार्ग का लंबा हो जाना है। खाड़ी क्षेत्र को टालते हुए उड़ानों को वैकल्पिक रास्तों से गुजरना पड़ रहा है, जिससे:
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उड़ान का समय लंबा हो रहा है
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ईंधन की लागत बढ़ रही है
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क्रू ड्यूटी टाइम और परिचालन खर्च बढ़ रहे हैं
उड़ानों की बड़ी संख्या रद्द
सोमवार को लगभग 700 उड़ानें रद्द हुईं, जबकि मंगलवार को भी बंगलूरू, मुंबई और दिल्ली से लगभग 230 उड़ानें प्रभावित हुईं। कोलकाता से भी रोजाना करीब 20 उड़ानें बाधित हो रही हैं।
जब कई उड़ानें रद्द होती हैं, तो सीटों की संख्या कम हो जाती है, जिससे मांग और आपूर्ति का अंतर बढ़ता है और किराये सामान्य से कहीं अधिक हो जाते हैं।
यात्रियों को राहत देने के प्रयास
एअर इंडिया और इंडिगो जैसी भारतीय एयरलाइंस सीमित उड़ानों के साथ संचालन कर रही हैं। खाड़ी क्षेत्र से फंसे यात्रियों को निकालने के लिए एतिहाद एयरवेज और एमिरेट्स ने अतिरिक्त उड़ानों की भी घोषणा की है।
यात्रियों की परेशानियां
कई यात्रियों की पहले से बुक टिकटें रद्द हो चुकी हैं। उनकी सबसे बड़ी शिकायतें हैं:
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कस्टमर केयर से संपर्क नहीं हो पाना
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रिफंड प्रक्रिया की अस्पष्टता
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नई टिकटों की अत्यधिक कीमत
यात्रियों का कहना है कि न तो वे समय पर यात्रा कर पा रहे हैं और न ही अपनी रकम की वापसी को लेकर आश्वस्त हैं।
आगे की स्थिति
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में हालात स्थिर होने तक हवाई किराए में अस्थिरता और उड़ानों में रद्दीकरण जारी रह सकता है। ट्रैवल एजेंट्स की सलाह है कि अगर यूरोप या खाड़ी देशों की यात्रा जरूरी न हो, तो इसे कम से कम एक महीने के लिए टालना ही बेहतर रहेगा।