नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2027 के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था 6.8 से 7.2 प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। यह अनुमान ईवाई इकोनॉमी वॉच की नवीनतम रिपोर्ट में दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस तेज़ आर्थिक विकास से न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि बाजार में नकदी का प्रवाह भी बढ़ेगा, जिससे आम जनता की वित्तीय स्थिति में सुधार होगा।

अर्थशास्त्रियों के अनुसार इस विकास के पीछे सरकार द्वारा हाल ही में उठाए गए मजबूत नीतिगत कदम और मध्यम अवधि की स्थिर संभावनाएं मुख्य कारण हैं।

द्विपक्षीय व्यापार समझौते और आर्थिक मजबूती

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत ने हाल के वर्षों में कई अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते किए हैं, जिनका सीधा लाभ देश की अर्थव्यवस्था को मिल रहा है। ईवाई इंडिया के मुख्य नीति सलाहकार डीके श्रीवास्तव के अनुसार, भारत ने प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं और बड़े आर्थिक समूहों के साथ अपने व्यापारिक नेटवर्क का काफी विस्तार किया है।

इन समझौतों और देश में चल रहे संरचनात्मक सुधारों के कारण भारतीय बाजार अब वैश्विक स्तर पर अधिक सशक्त और प्रतिस्पर्धी बन रहा है।

टैक्स सुधारों का प्रभाव

चालू वित्त वर्ष में सरकार ने पर्सनल इनकम टैक्स और वस्तु एवं सेवा कर (GST) में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य आम जनता की खर्च करने योग्य आय बढ़ाना है। जब लोगों के हाथ में अधिक पैसा होगा, तो वे अपनी जरूरतों पर अधिक खर्च कर सकेंगे।

रिपोर्ट के अनुसार, यह बढ़ता खर्च अर्थव्यवस्था की वृद्धि में अहम भूमिका निभाएगा। हालांकि, टैक्स में दी गई राहत के कारण सरकार को राजस्व में कमी झेलनी पड़ सकती है, और वित्त वर्ष 2026 के लिए निर्धारित सकल कर राजस्व के लक्ष्य पूरी तरह से हासिल नहीं हो सकते।

विकसित भारत 2047 का लक्ष्य

सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य ‘विकसित भारत 2047’ है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए टैक्स-टू-जीडीपी अनुपात में निरंतर वृद्धि आवश्यक है। चूंकि हाल ही में बड़े टैक्स सुधार लागू किए जा चुके हैं, इसलिए अब ध्यान मुख्य रूप से टैक्स अनुपालन और राजकोषीय अनुशासन को सख्ती से लागू करने पर होगा।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की नीतियां वित्तीय स्थिरता और विकास को मजबूती देंगी, और इस वर्ष राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को सफलतापूर्वक पूरा किया जा सकेगा।