नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) में 20 फरवरी 2026 को समाप्त सप्ताह में हल्की गिरावट देखी गई। भंडार 2.11 अरब डॉलर घटकर 723.608 अरब डॉलर पर आ गया। गिरावट के बावजूद यह ऐतिहासिक रूप से उच्च स्तर पर बना हुआ है।
पिछले सप्ताह रिजर्व ने नया रिकॉर्ड बनाया था। 13 फरवरी को समाप्त हुए सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 725.727 अरब डॉलर तक पहुंच गया था, जो 8.66 अरब डॉलर की बढ़ोतरी के साथ ऑल-टाइम हाई था। जनवरी 2026 में यह 723.774 अरब डॉलर का रिकॉर्ड दर्ज कर चुका था। विशेषज्ञ इस सप्ताह की गिरावट को सामान्य उतार-चढ़ाव का हिस्सा मान रहे हैं।
विदेशी मुद्रा भंडार क्यों है महत्वपूर्ण?
फॉरेक्स रिजर्व किसी भी देश की आर्थिक मजबूती का महत्वपूर्ण संकेतक होता है। इसका उपयोग आयात भुगतान, विदेशी कर्ज की अदायगी और रुपये की स्थिरता बनाए रखने के लिए किया जाता है। मजबूत भंडार वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के समय देश को सुरक्षा प्रदान करता है।
गिरावट के पीछे संभावित कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, रिजर्व में कमी के पीछे विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में बदलाव, डॉलर की मजबूती और आरबीआई द्वारा रुपये को स्थिर रखने के लिए बाजार में हस्तक्षेप शामिल हो सकता है। केंद्रीय बैंक अक्सर विनिमय दर में तेज उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए डॉलर की खरीद-बिक्री करता है, जिससे भंडार में अस्थायी बदलाव देखने को मिलता है।
आगे की स्थिति पर क्या संकेत हैं?
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अभी भी सुरक्षित और मजबूत स्तर पर है। मजबूत निर्यात, स्थिर पूंजी प्रवाह और निवेशकों का भरोसा आने वाले महीनों में रिजर्व को और सहारा देगा। कुल मिलाकर, हाल की गिरावट को चिंता की बजाय सामान्य आर्थिक गतिविधियों का हिस्सा माना जा रहा है, और भारत अब भी विश्व के सबसे बड़े फॉरेक्स भंडारों में शामिल है।