नई दिल्ली। भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी जरूरतों को पूरा करने के लिए अमेरिका की ओर एक बड़ा रणनीतिक रुख अपना रहा है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने संकेत दिए हैं कि भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर (करीब 41 लाख करोड़ रुपये) का सामान खरीद सकता है। इस 'मेगा ट्रेड डील' का प्रारूप लगभग तैयार है और मार्च में इसे अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है।
इस समझौते का फोकस मुख्य रूप से ऊर्जा स्रोतों में विविधता, हाई-टेक उपकरण और विमानन क्षेत्र पर होगा। अमेरिका के अनुसार भारत ने रूसी तेल के आयात को सीधे या परोक्ष रूप से रोकने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की है। इससे स्पष्ट होता है कि भारत अब अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए सीमित स्रोतों पर निर्भर नहीं रहना चाहता।
कोकिंग कोल और ऊर्जा की जरूरतों पर ध्यान
पीयूष गोयल ने मुंबई में कहा कि भारत कच्चे तेल और कोकिंग कोल के स्रोतों में विविधता लाना चाहता है। कोकिंग कोल, जो स्टील उद्योग के लिए अहम कच्चा माल है, पर मंत्री ने चिंता जताई। उन्होंने कहा, "हम अभी कोकिंग कोल के लिए केवल 2-3 देशों पर निर्भर हैं और इनकी कीमतें अक्सर बदलती रहती हैं। अमेरिका से उच्च गुणवत्ता वाला कोकिंग कोल लाने का विकल्प स्वागत योग्य है।"
रूसी तेल पर रुख में बदलाव
भू-राजनीतिक रूप से भी यह कदम महत्वपूर्ण है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में भारत पर रूसी तेल आयात पर लगाए गए 25% टैरिफ को हटा दिया। यह इसलिए संभव हुआ क्योंकि भारत ने मास्को से सीधे या परोक्ष रूप से तेल आयात को रोकने की प्रतिबद्धता जताई। इसे भारत की तेल कूटनीति में बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
हाई-टेक मांग और एआई के अवसर
इस व्यापार समझौते में सिर्फ कच्चे माल तक ही सीमित नहीं है। अगले पांच वर्षों में भारत अमेरिका से लगभग 100 अरब डॉलर मूल्य के विमान और एआई चिप्स खरीदने की योजना बना रहा है। यह कदम घरेलू विमानन क्षमता बढ़ाने और हवाई किराए कम करने में मदद करेगा। इसके अलावा, भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के लिए GPU, डेटा सेंटर उपकरण और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सिस्टम की भी आवश्यकता है, जिसे अमेरिका प्रदान कर सकता है।
एआई के डर को किया खारिज
शेयर बाजार में एआई से भारतीय आईटी कंपनियों को नुकसान पहुंचने की चर्चा पर पीयूष गोयल ने कहा कि यह बिल्कुल हास्यास्पद है। उनका कहना है कि एआई के विकास के लिए भारत की आईटी कंपनियां ही सबसे महत्वपूर्ण आधार होंगी।
अंतरिम समझौते की प्रक्रिया
भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल अगले सप्ताह अमेरिका रवाना होगा। पीयूष गोयल ने जोर देकर कहा कि पिछले चार वर्षों में भारत ने नौ महत्वपूर्ण समझौते किए हैं और अब देश अपने दबाव के बजाय मजबूती के आधार पर भविष्य के लिए शर्तों पर बातचीत कर रहा है।