नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार रात भारत के लिए टैरिफ में बड़ी कटौती का ऐलान किया। उनके मुताबिक, भारतीय उत्पादों पर अब 25 फीसदी की जगह 18 फीसदी शुल्क लगेगा। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिका और भारत के बीच एक व्यापक व्यापार समझौता हुआ है, जिसके तहत भारत 500 अरब डॉलर से अधिक के अमेरिकी सामान खरीदेगा और अपने कई टैरिफ व गैर-टैरिफ अवरोधों को खत्म करेगा। हालांकि, इस कथित समझौते पर न तो व्हाइट हाउस और न ही भारत सरकार की ओर से अभी कोई औपचारिक पुष्टि की गई है।

भारतीय निर्यातकों को मिलेगा फायदा
टैरिफ घटने से अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की कीमतें अपेक्षाकृत प्रतिस्पर्धी होंगी। इससे पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश जैसे देशों की तुलना में भारत को बढ़त मिलने की संभावना है और निर्यातकों को नए ऑर्डर मिलने का रास्ता खुल सकता है।

50% से सीधे 18% पर आया शुल्क
व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25 फीसदी दंडात्मक शुल्क को भी हटा दिया गया है। यानी पहले कुल मिलाकर 50 फीसदी तक पहुंच चुका टैक्स अब घटकर सीधे 18 फीसदी रह जाएगा। इससे भारत उन चुनिंदा देशों में आ गया है, जिन पर अमेरिका अपेक्षाकृत कम शुल्क लगा रहा है।

दूसरे देशों के मुकाबले भारत की स्थिति
ट्रंप प्रशासन ने जिन देशों पर सबसे ज्यादा टैरिफ लगाया है, उनमें ब्राजील (50%), म्यांमार और लाओस (40-40%), चीन (37%) और दक्षिण अफ्रीका (30%) शामिल हैं। वहीं वियतनाम और बांग्लादेश पर 20%, पाकिस्तान, मलेशिया, कंबोडिया और थाईलैंड पर 19% शुल्क लगाया गया है। इन सभी की तुलना में भारत अब बेहतर स्थिति में नजर आता है।

हालांकि कुछ देशों को भारत से भी कम टैरिफ का लाभ मिल रहा है। अमेरिका यूनाइटेड किंगडम पर 10% जबकि यूरोपीय संघ, स्विट्जरलैंड, जापान और दक्षिण कोरिया पर 15% शुल्क लगाता है। उल्लेखनीय है कि ट्रंप के दोबारा सत्ता में आने से पहले भारत पर अमेरिका का औसत शुल्क इससे भी कम था।

डील की शर्तों पर अब भी सस्पेंस
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप द्वारा बताए गए समझौते की शर्तें कब से लागू होंगी। भारत की ओर से रूसी तेल आयात या अन्य संवेदनशील मुद्दों पर भी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में बाजार और व्यापार जगत इस पूरे घटनाक्रम पर दोनों सरकारों की औपचारिक घोषणा का इंतजार कर रहा है।