नई दिल्ली। दिवालिया और परिसमापन से जुड़े मामलों पर नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने एक अहम फैसला सुनाया है। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया है कि किसी कंपनी द्वारा कर्मचारियों के लिए अलग से PF या ग्रेच्युटी फंड का अलग खाता न बनाए जाने की स्थिति में भी कर्मचारियों का यह अधिकार खत्म नहीं होता कि उन्हें उनका पूरा बकाया भुगतान मिले।

NCLAT ने यह फैसला Jet Airways के पूर्व कर्मचारियों से जुड़े मामले में सुनाया। इस दौरान ट्रिब्यूनल ने State Bank of India सहित अन्य वित्तीय लेनदारों की अपीलों को खारिज कर दिया।

क्या कहा NCLAT ने?

ट्रिब्यूनल ने कहा कि कर्मचारियों का Provident Fund और Gratuity का बकाया वैधानिक देयता (statutory dues) है और इसे लिक्विडेशन एस्टेट का हिस्सा नहीं माना जा सकता। इसलिए, भले ही कंपनी ने अलग से PF या ग्रेच्युटी फंड का निर्माण न किया हो, कर्मचारियों को उनका पूरा भुगतान मिलना अनिवार्य है।

यह मामला तब शुरू हुआ जब जालान-फ्रिट्श कंसोर्टियम का समाधान प्रस्ताव विफल होने के बाद जेट एयरवेज लिक्विडेशन प्रक्रिया में चली गई। इसके बाद पूर्व कर्मचारियों ने दावा किया कि उनका PF और ग्रेच्युटी बकाया Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) के तहत परिसंपत्ति का हिस्सा नहीं होना चाहिए।

वहीं, बैंकों और लेनदारों का तर्क था कि यह सुरक्षा केवल तभी लागू हो सकती है जब लिक्विडेशन शुरू होने के समय अलग फंड मौजूद हो। लेकिन NCLAT ने इस दलील को अस्वीकार कर दिया।

ट्रिब्यूनल ने यह भी स्पष्ट किया कि लिक्विडेटर की जिम्मेदारी है कि वह EPF Act, 1952 और Payment of Gratuity Act, 1972 के अनुसार कर्मचारियों को उनका पूरा बकाया भुगतान सुनिश्चित करे।

हालांकि, ट्रिब्यूनल ने कर्मचारियों की उस मांग को स्वीकार नहीं किया जिसमें वेतन बकाये को लिक्विडेशन एस्टेट से बाहर रखने की बात कही गई थी। कोर्ट ने कहा कि वेतन संबंधी दावों का निपटारा IBC के वॉटरफॉल मैकेनिज्म के तहत ही किया जाएगा।