चित्रकूट में वर्ष 2018 के बहुचर्चित शिवलोचन विश्वकर्मा हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम/स्पेशल एनडीपीएस एक्ट की अदालत ने मृतक की पत्नी माया देवी और उसके कथित प्रेमी टुल्लू लोध को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

अदालत ने दोनों दोषियों पर हत्या के मामले में 10-10 हजार रुपये तथा साक्ष्य छिपाने के अपराध में 4-4 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। इसके अलावा साक्ष्य नष्ट करने के लिए 7-7 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा भी दी गई है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

न्यायालय ने मामले को गंभीर अपराध माना, लेकिन इसे “रेयर ऑफ द रेयरेस्ट” श्रेणी में नहीं रखते हुए मृत्युदंड देने से इनकार कर दिया।

अपर जिला शासकीय अधिवक्ता अजय कुमार सिंह के अनुसार, यह मामला 7 जुलाई 2018 को सामने आया था, जब मृतक के भाई ने पुलिस को बताया कि शिवलोचन करीब छह महीने से लापता हैं और उनकी पत्नी माया देवी व गांव के ही टुल्लू लोध पर हत्या का संदेह जताया गया।

जांच के दौरान पुलिस ने दोनों आरोपियों को कर्वी बस स्टैंड से गिरफ्तार किया था। पूछताछ और जांच में सामने आया कि टुल्लू लोध का शिवलोचन के घर आना-जाना था और इसी दौरान माया देवी से उसके संबंध बन गए थे।

घटना से जुड़े तथ्यों के अनुसार, नवंबर 2017 में शिवलोचन को इन संबंधों की जानकारी मिल गई थी, जिसके बाद विवाद बढ़ा। आरोप है कि उसी रात माया देवी ने टुल्लू को बुलाकर शिवलोचन की हत्या की और शव को घर के अंदर गड्ढा खोदकर दबा दिया गया।

कुछ समय बाद दोनों आरोपी अलग-अलग स्थानों पर चले गए और बाद में मुंबई में रहने लगे। जून 2018 में माया देवी भी टुल्लू के पास चली गई थी।

मामले का खुलासा तब हुआ जब जुलाई 2018 में घर के अंदर जमीन धंसने पर संदेह हुआ। सूचना मिलने पर पुलिस ने खुदाई करवाई, जिसमें शिवलोचन का कंकाल बरामद हुआ। परिजनों ने कपड़ों और माला के आधार पर शव की पहचान की।