अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूरोपीय देशों पर नए आयात शुल्क लगाने की चेतावनी के बाद मंगलवार को दुनियाभर के शेयर बाजारों में भारी दबाव देखने को मिला। वॉल स्ट्रीट के तीनों प्रमुख इंडेक्स एक ही दिन में तीन महीनों की सबसे बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए, जिससे वैश्विक निवेशकों में घबराहट का माहौल बन गया।
एसएंडपी 500 में 2.06 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 6,796.86 पर बंद हुआ। नैस्डैक कंपोजिट 2.39 प्रतिशत टूटकर 22,954.32 पर आ गया, जबकि डॉव जोंस 1.76 प्रतिशत गिरकर 48,488.59 के स्तर पर बंद हुआ। एसएंडपी 500 और नैस्डैक दोनों अपने 50-दिवसीय औसत स्तर से नीचे फिसल गए, जिसे तकनीकी संकेतों में कमजोरी माना जाता है।
सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ा रुझान
शेयर बाजार में बिकवाली के साथ ही निवेशकों ने सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख किया। सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं। वहीं अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में बिकवाली से यील्ड में उछाल आया। क्रिप्टो बाजार भी दबाव में रहा और बिटकॉइन तीन प्रतिशत से अधिक टूट गया।
आठ यूरोपीय देशों पर शुल्क लगाने की चेतावनी
ट्रंप ने घोषणा की है कि 1 फरवरी से डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, फिनलैंड और ब्रिटेन से आने वाले सामान पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा, जिसे 1 जून से बढ़ाकर 25 प्रतिशत किया जा सकता है। यह शुल्क तब तक लागू रहेगा, जब तक ग्रीनलैंड को लेकर कोई समझौता नहीं हो जाता। हालांकि डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों ने स्पष्ट किया है कि द्वीप बिक्री के लिए नहीं है।
बढ़ा बाजार डर का संकेतक
टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितता ने बाजार में फिर वही माहौल बना दिया, जो अप्रैल में ‘लिबरेशन डे’ के समय देखा गया था। निवेशकों की घबराहट को दर्शाने वाला वोलैटिलिटी इंडेक्स (VIX) बढ़कर 20.09 पर पहुंच गया, जो नवंबर के बाद का उच्चतम स्तर है। इस दौरान अमेरिकी बाजारों में 20 अरब से अधिक शेयरों का कारोबार हुआ।
भारत और एशिया पर भी असर
वैश्विक कमजोरी का असर भारतीय बाजारों पर भी दिखा। सेंसेक्स 1,065 अंकों की गिरावट के साथ 82,180 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50, 1.38 प्रतिशत टूटकर 25,232 के स्तर पर आ गया। इस गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में करीब 9.86 लाख करोड़ रुपये की कमी आंकी गई। एशियाई बाजारों में भी लगातार तीसरे सत्र में कमजोरी बनी रही।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल यह गिरावट घबराहट का परिणाम हो सकती है। हैरिस फाइनेंशियल ग्रुप के जेमी कॉक्स के अनुसार, अभी बड़े पैमाने पर पूंजी पलायन के संकेत नहीं हैं, लेकिन बॉन्ड बाजार में हो रहे उतार-चढ़ाव पर नजर रखना जरूरी होगा।
आने वाले दिनों में निवेशकों की निगाह अमेरिका के जीडीपी आंकड़ों, पीएमआई रिपोर्ट, पीसीई महंगाई डेटा और बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी, जो बाजार की आगे की दिशा तय कर सकते हैं।