गौ यानी गाय और गौ सेवा से जुड़ी दो खबरें सामने आई। एक समाचार प्रदेश की राजधानी लखनऊ का है जिसमें बताया गया कि राज्य गौ सेवा आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि गौ सेवा आश्रय स्थलों को आत्मनिर्भर बनाने के लिये उत्कृष्ट कार्य करने वाली विभूतियों को सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि गौ सेवा भारतीय सांस्कृतिक परम्परा का अभिन्न अंग है। गौ सेवा स्थलों, गौशालाओं की समुन्नति के लिए किसानों, पशुपालकों के बीच समन्वय एवं निराश्रित गोवंश की सुरक्षा पर भी मुख्यमंत्री जी ने महत्वपूर्ण सुझाव दिये।
दूसरा समाचार मथुरा का है। फिरोजाबाद जिले के ग्राम सिरसागंज निवासी चन्द्रशेखर 11 वर्ष की अल्पायु में घर छोड़ निकल गये थे। 40 बरस बाद पता चला कि वे अयोध्या में है और गौ सेवा को अपना जीवन समर्पित कर दिया। उनसे घर लौटने का आग्रह किया गया, किन्तु वे नहीं माने। थाना बरसाना के गांव आजनौख में गौशाला स्थापित कर ली। वे फरसे वाले बाबा के नाम से प्रसिद्ध हो गये।
21 मार्च को उन्हें सूचना मिली कि गौतस्कर ट्रक में गोवंश लेकर आ रहे हैं। वे ट्रक को चैक करने लगे। पीछे आ रहे ट्रक ने खड़े ट्रक में जोरदार टक्कर मारी। भगवाधारी गौरक्षक दो ट्रकों के बीच में कुचल कर तत्काल मौके पर मर गया। बताया जा रहा है कि ट्रक नागालैंड से आया था जिसे खुर्शीद नामक ड्राइवर चला रहा था। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार ने कहा है कि यह सामान्य दुर्घटना थी, हत्या नहीं। डी.आई.जी आगरा रेंज शैलेश पांडेय ने कहा कि जिन लोगों ने पुलिस वाहन क्षतिग्रस्त किये हैं या पुलिस पर पथराव किया है, उन्हें बख्शेंगे नहीं। पुलिस अधिकारी बारबार कह रहे हैं कि जिस ट्रक को फरसा बाबा टटोल रहे थे, उसमें किरयाने का सामान भरा था, गोवंश नहीं। खुर्शीद दुर्घटना में मरा या लिंचिंग हुई, इस पर भी प्रशासन मौन है।
यक्ष प्रश्न यह है कि पुलिस के रहते गौवंश की तलाशी की नौबत आती क्यों है। गौवंश तस्करी तथा गोवध रोकना पुलिस का काम है। निजी गौरक्षकों के हस्तक्षेप की नौबत नहीं आनी चाहिए।
गोविंद वर्मा
संपादक 'देहात'