न जाने क्यों कुछ नेताओं ने सोच लिया था कि कट्टर इस्लामिक नेता डॉ. मोहम्मद यूनुस के बांग्लादेश के कार्यवाहक प्रधानमंत्री पद से हटने और तारिक रहमान के सत्ता रूढ़ होने से बांग्लादेशी हिन्दुओं का उत्पीड़न रुक जाएगा। यह खामख्याली उनके दिमाग में कहां से आई, ये तो वे ही जानें किन्तु यह शोभकारी समाचार है कि तारिक रहमान के सत्ता रूढ़ होने से हिन्दुओं का उत्पीड़न और मन्दिरों का विध्वंस रुक जाएगा। खबर है कि बांग्लादेश के बोगरा जिले में हिन्दू विरोधी कट्टरपंथी मुसलमानों की भीड़ ने चयन राजभर नाम के हिन्दू की धारदार हथियारों से काट कर हत्या कर दी। 7 मार्च को कॉक्स बाजार में 29 वर्षीय गणेश पाल की हत्या कर दी गई। चटगांव मे आकाश दास और बदरपाड़ा में चंदन डे नामक हिन्दुओं को मुसलमानों ने मौत के घाट उतार दिया। 8 मार्च को कोमिला शहर के कालीगाछ काली मंदिर के पुजारी केशव चक्रवर्ती तथा मंदिर में आये हुए 3 श्रद्धालुओं पर मुस्लिमों ने धावा बोल दिया। चारों गंभीर रूप से घायल हो गए।

बांग्लादेश में हिन्दुओं और मन्दिरों पर पूर्ववत हमले जारी हैं। सत्ता परिवर्तन के बाद भी वहां हिन्दू विरोधी लहर जारी है। डेढ़ करोड़ हिन्दुओं पर चौबीसों घंटे तलवार लटकी है। इनकी जान माल, इज्जत सुरक्षित नहीं। सबसे खेदजनक स्थिति यह है कि बांग्लादेश में ही नहीं भारत में भी हिन्दू विरोधी सक्रिय हैं। कट्टरपंथी और बाबर तथा खामेनेई के प्रेमी ओवैसी भारत सरकार से ईरान फ्रंट पर भारतीय सेना भेजने की अपील करते हैं। अखिलेश को खाड़ी देशों में फंसे एक करोड़ लोगों को सुरक्षित लाने की चिंता है लेकिन बांग्लादेश के हिंदुओं का फिक्र नहीं। सोनिया, प्रियंका, राहुल व खड़गे सब का यही हाल है। कोई नहीं चाहता कि बांग्लादेश में हिन्दू भी सम्मान की सुरक्षित जिन्दगी जी सकें।

गोविंद वर्मा 

संपादक 'देहात'