नीतीश कुमार के पटना से दिल्ली जाने पर सबसे अधिक हैरानी और परेशानी तेजस्वी यादव को हुई। बोले कि भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें 'पूरी तरह' हाईजैक कर लिया है। बिहार के इस अप्रत्याशित घटनाक्रम पर कांग्रेस की गाली ब्रिगेड के कमाण्डर जयराम रमेश को तो कुछ कहना ही था। उन्होंने कहा- नीतीश को दिल्ली भेजना बिहारी मतदाताओं का अपमान है। उन्हें बिहारियों ने बिहार के लिये चुना था। जो कांग्रेस अपने दिग्गज नेताओं को ताश के पत्तों की तरह फेंटकर इधर-उधर करती रही, उस पार्टी के नेता नीतीश कुमार के राज्यसभा में जाने पर स्यापा क्यों कर रहे हैं।
हां, जनता दल यूनाइटेड के नेता व कार्यकर्ता अवश्य ही सुशासन बाबू के पटना छोड़ने से अचंभित और दुःखी हुवे। टी.वी. पर देखा, कुछ के तो आंसू निकल रहे थे। के.सी. त्यागी की घिग्घी बंधी हुई थी- भाव भंगिमा कह रही थी- 'राम जाने क्या होगा आगे।'
यह सर्वविदित है कि 10 बार मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार ने लालू ब्रांड जंगलराज को खत्म करने और बिहार को विकास पथ पर अग्रसर करने में अपनी सारी ऊर्जा लगाई। बिहार की छवि सुधारने का सच्चे मन से प्रयास किया। अति पिछड़ों को हृदय से लगाया। नौकरियों, ठेकों और टेंडरों को बेच कर रकम अंटी में नहीं लगाई। उनके दामन पर एक भी दाग नहीं।
इंडी गठबंधन का दुर्भाग्य था कि राहुल गांधी ने नीतीश कुमार को ठुकराया, अपमानित किया। मीसा भारती के साथ मटन (मांस) के मसाले भूनने में लग गये और एक सक्षम राजनीतिज्ञ को खो बैठे। नीतीश इंडी के मुखिया होते तो बिहार ही की नहीं, भारत की राजनीतिक तस्वीर कुछ और होती ।
बिहार के नये राजनीतिक परिवेश में भाजपा, (एनडीए), जदयू, लालू परिवार, कांग्रेस को क्या हासिल होगा या कुछ हानि होगी, यह भविष्य तय करेगा लेकिन नीतीश कुमार ने बिहार की दीवारों पर जो पटकथा उकेर दी है, उसे लालू परिवार और राहुल गांधी कभी मिटा नहीं पायेंगे। बिहार में नीतीश का नाम अमिट रहेगा।
गोविंद वर्मा
संपादक 'देहात'