फाग (रंगोत्सव) कालरात्रि को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की हिन्दू बहुल बस्ती उत्तमनगर में जो कुछ हुआ, वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के लिए विचारणीय आंखें खोलने जैसा है। यदि भाजपा के ये दोनों नेता उत्तमनगर की इस घटना की उपेक्षा करते हैं, दबाते हैं या कोई समुचित कार्रवाई नहीं कराते तो मान लिया जाएगा कि मोदी सरकार भी तुष्टीकरण की नीति को अपनाये हुए हैं।

उत्तमनगर दिल्ली का हिन्दू बहुल क्षेत्र है। मुस्लिम आबादी अपेक्षाकृत कम है। फागवाले दिन एक गली के मकान की छत पर कुछ बच्चे गुब्बारों में पानी भर कर एक-दूसरे पर डाल रहे थे। एक छोटी लड़की के हाथ से पानी का गुब्बारा छूट कर नीचे गली में जा पड़ा। नीचे गली में एक बुर्कानशीं महिला जा रही थी। पानी का गुब्बारा महिला के कपड़ों को छूता हुआ जमीन पर जा गिरा। घटना साधारण थी। बच्चे होली मनाते रहे। कुछ देर बाद 25-30 मुसलमानों का हथियारबंद समूह उस मकान में घुसा जिसकी छत पर बच्चे खेल रहे थे। मुस्लिमों के इस समूह ने गाली-गलौज शुरू और घर में तोड़-फोड़, मारधाड़ शुरू कर दी। हमलावर रंग डालने का मजा सिखाने की बात कर रहे थे। घर में ऐसा कोई नहीं बचा था, जिसको चोटें न आई हों। महिलाओं से अभद्रता की और उन्हें भी पीटा। घर का सामान, टी.वी आदि भी तोड़ डाला। जाते समय न केवल पीड़ित परिवार के, बल्कि आस-पास के लोगों के घरों की बाहर से कुण्डी (सांकल) लगा दी कि लोग बाहर आकर उनकी गुंडागर्दी को न रोक सकें।

मुस्लिम आक्रमणकारियों की बर्बरता और वहशियाना हरकत तो रात्रि के 11 बजे शुरू होती है। जिस घर पर मुस्लिमों ने संगठित गिरोह की भांति हमला किया था, उस परिवार का तरुण नाम का 27 वर्षीय युवक अपने मित्रों के साथ रंग खेलने बाहर गया हुआ था। उसे दिन के घटनाक्रम का कुछ ज्ञान न था। जैसे ही उसने अपने घर के सामने बाइक रोकी, पहले से घात लगाये बैठे 18-20 मुस्लिमों की टोली उस पर टूट पड़ी और लाठी डंडों, धारदार हथियारों से पीट कर अधमरा कर दिया। बाद में पत्थर से सिर व पेट पर अंधाधुंध प्रहार कर तरुण को कुचल डाला। तरुण के मरने के बाद सब अपने-अपने घरों पर ताला लगा कर फरार हो गये।

उत्तमनगर में हुई इस दुस्साहसिक व बर्बर घटना से मोहल्ले में कोहराम मच गया। हिन्दू संगठनों के युवा कार्यकर्ता नारेबाजी करने लगे जिन पर पुलिस लाठियां फटकारने लगी।

लोग योगी आदित्यनाथ को याद‌ कर रहे थे और हमला करने वालों के मकानों को बुल्डोजर से जमींदोज़ करने की मांग कर रहे थे। तरुण के हत्यारों का उत्तरप्रदेश जैसा अंजाम करने की बात कर रहे थे।

राजधानी की इस खौफनाक घटना को स्थानीय विवाद कह कर नहीं टाला जा सकता। जो मुस्लिम नेता देश में गृहयुद्ध तथा गजवा-ए-हिन्द की धमकियां दे रहे हैं, उनका सन्देश भारत की गली-गली में फैल चुका है। सरकार इस खतरे से निपटने के बजाय यदि शुतुरमुर्ग की तरह जमीन में सिर गड़ाती है तो इसका भयंकर परिणाम निकलेगा। जनता ने जिनको देश की जिम्मेदारी सौंपी है, उन्हें अपने उत्तरदायित्वों का निर्वाहन करना ही पड़ेगा। जनता झोला उठा कर इन्हें भागने नहीं देगी।

यहां मुजफ्फरनगर जनपद के करौली थाना क्षेत्र के एक कन्या विद्यालय की घटना का भी उल्लेख करना चाहेंगे। होली की छुट्टियों से पहले छोटी बच्चियां आपस में गुलाल लगा रही थीं। एक मुस्लिम छात्रा के मुंह पर गुलाल लग गया। मुस्लिम छात्रा के घर वालों ने अन्य लोगों को साथ लेकर गुलाल लगाने वाली दलित छात्रा को पीट पीट कर अधमरा कर दिया। पुलिस ने अपना मुंह उजागर करने को उमरदीन नामक हमलावर को गिरफ्तार कर लिया, शेष पकड़े जाएंगे या यहीं पर पूर्ण विराम लग गया, कौन जाने?

ये घटनायें किस ओर संकेत करती है। इनके गहरे फलितार्थ निकलने हैं। दिल्ली की हालिया घटना गृह मंत्री को चेताने के लिए पर्याप्त है। उन्हें चेतना ही होगा।

गृह मंत्री अमित शाह के लिए यह बड़ी शर्मिंदगी है कि राजधानी की पुलिस इतने संवेदनशील मामले में लॉर्ड कर्जन के जमाने वाले हथकंडे आज भी अपना रही है। रोहिणी का डीसीपी सांप्रदायिक विद्वेष की घटना को 50 वर्ष पुराने झगड़े से जोड़ कर लीपापोती कर रहा है। इस पुलिसिया सोच से गृहमंत्री की बदनामी हुई है। आश्चर्य है कि ऐसी निकम्मी पुलिस को राष्ट्रीय राजधानी की कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी हुई है। राजनीति का चाणक्य माने जाने वाले अमित शाह को अपनी निकम्मी पुलिस को सुधारने की और भी ध्यान देना होगा।

गोविंद वर्मा

संपादक 'देहात'