यह समाचार दुःखद भी है, शर्मनाक भी कि जिला अधिकारी निवास के समीप मेरठ मार्ग पर नवनिर्मित महर्षि शुकदेव आरोग्य पथ को कुछ असामाजिक तत्वों ने क्षतिग्रस्त कर दिया है। आरोग्य पथ पर लगे झूले, लाइट व बैनर तोड़ कर इन्हें बदहाल किया गया है। यह दुर्दशा किसी सड़क चलते व्यक्ति ने तो की नहीं। निश्चित ही किसी समूह का काम है। आखिर वे लोग कौन हैं जिन्हें शहर की खूबसूरती पसन्द नहीं और जो शहर को अपना शहर नहीं मानते? जिन के दिमाग में गंदगी और कचरा भरा रहता है!
पाँच दशक पीछे लौटिये। इसी मेरठ रोड पर एक खुबसूरत खुशनुमा कम्पनी बाग हुआ करता था जिसमें हर मौसम के फूल और फल हुआ करते थे। शानदार दरबार हॉल व फ़िजाओं को महकाने वाली खुशबू तैरती थी। यहां आने वाले दर्शक फव्वारे की शोभा को निहार कर आनन्दित होते। महिलायें और बच्चे बेखौफ कम्पनी बाग में विचरण करते थे।
और फिर इन्हीं असामाजिक तत्वों की दृष्टि शहर के सुन्दर रमणीक स्थल को टिड्डी दल की भांति चट कर गई। इन असामाजिक तत्वों का कम्पनी बाग पर आधिपत्य हो गया, और भले लोगों, संभ्रांतजनों ने कम्पनी बाग जाना छोड़ दिया। जिन्हें रोज़ दौड़ लगानी है, वर्जिश करनी है, वे ही कम्पनी बाग का रुख करते हैं।
एक बात और जब श्रीमती अंजू अग्रवाल नगरपालिका की चेयरपर्सन निर्वाचित हुईं तब उन्होंने नगर की साफ-सफाई की दृष्टि से पूरे शहर में सूखे व गीले कूड़े के पात्र (बाल्टियां) टंगवाई थीं। इनकी संख्या हजारों में थी। भाई लोगों ने एक महीने के भीतर सारे कूड़ादान भट्टियों में पहुंचा दिये। वास्तव में ये असामाजिक तत्व बड़े चौकस हैं। जब विद्याभूषण जी वन मंत्री नियुक्त हुए थे, तब उन्होंने मेरठ रोड पर वृक्षारोपण कराया और लोहे के ट्री गार्ड लगवाये थे। एक सप्ताह के अन्दर सभी साफ हो गए।
कमाल यह है कि इन असामाजिक तत्वों को आज तक कोई न देख पाया, न पकड़ पाया !
गोविंद वर्मा
संपादक 'देहात'