नई दिल्ली। चीन ने एक बार फिर अरुणाचल प्रदेश को लेकर विवादित बयान दिया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने दावा किया कि अरुणाचल प्रदेश के कुछ इलाकों के नाम बदलना चीन की संप्रभुता के अधिकार के अंतर्गत आता है। उन्होंने यह भी कहा कि बीजिंग ने कभी भी अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा नहीं माना है।
चीन के इस बयान को भारत पहले ही सख्त शब्दों में खारिज कर चुका है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने 12 अप्रैल को स्पष्ट कर दिया था कि इस तरह के दावे पूरी तरह निराधार हैं और इन्हें भारत स्वीकार नहीं करता। भारत ने चीन की इस कार्रवाई को दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशों के लिए नुकसानदायक बताया था।
भारत ने बताया भ्रामक कदम
दरअसल, 10 अप्रैल को चीन ने अरुणाचल प्रदेश के कुछ स्थानों के नए नाम जारी करने की कोशिश की थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा था कि ऐसे कदम भ्रामक और बेबुनियाद हैं। भारत का स्पष्ट रुख है कि अरुणाचल प्रदेश हमेशा से देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा रहा है और आगे भी रहेगा।
चीन का बयान और संबंधों पर टिप्पणी
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह भी कहा कि मौजूदा समय में भारत और चीन के रिश्ते सामान्य रूप से स्थिर हैं। उन्होंने दावा किया कि बीजिंग भारत के साथ संबंधों को बेहतर बनाने और आगे बढ़ाने की नीति पर कायम है।
सीमा विवाद का पुराना मुद्दा
अरुणाचल प्रदेश को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से सीमा विवाद बना हुआ है। चीन अक्सर अपने नक्शों में भारतीय क्षेत्रों को शामिल करने या उनके नाम बदलने जैसी गतिविधियां करता रहा है, जिससे विवाद खड़ा होता है। वहीं भारत हर बार इन दावों को सख्ती से खारिज करते हुए अरुणाचल प्रदेश को अपना अभिन्न हिस्सा बताता रहा है।