नई दिल्ली। आईटी सेक्टर में इन दिनों वर्क कल्चर और कार्यस्थल नीतियों को लेकर विवाद लगातार बढ़ते जा रहे हैं। टीसीएस और इन्फोसिस के बाद अब टेक महिंद्रा भी चर्चा में आ गई है। मामला तब सामने आया जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट का स्क्रीनशॉट वायरल हुआ, जिसे बॉम्बे हाई कोर्ट के वकील आशुतोष के. दुबे से जुड़ा बताया गया।

पोस्ट में दावा किया गया था कि मुंबई के गोरेगांव स्थित कंपनी ऑफिस की कैंटीन को रमजान के दौरान नमाज और इफ्तार के लिए ‘फुटवियर-फ्री जोन’ घोषित किया गया था। हालांकि, टेक महिंद्रा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि यह दावा गलत और भ्रामक है।

कंपनी ने स्पष्ट किया कि आंतरिक जांच में इस तरह की किसी भी घटना की पुष्टि नहीं हुई है। टेक महिंद्रा ने दोहराया कि वह किसी भी प्रकार के धार्मिक भेदभाव के खिलाफ है और सभी कर्मचारियों को समान व सम्मानजनक कार्य वातावरण देने के लिए प्रतिबद्ध है।

टीसीएस और इन्फोसिस के मामलों की भी चर्चा

इससे पहले टीसीएस का नासिक विवाद भी सुर्खियों में रहा था, जहां कर्मचारियों ने यौन उत्पीड़न, धमकी और धार्मिक दबाव जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। इस मामले में कई एफआईआर दर्ज की गईं और जांच के दौरान कुछ गिरफ्तारियां भी हुईं।

वहीं इन्फोसिस के पुणे यूनिट से जुड़े मामले में सोशल मीडिया पर कुछ आरोप सामने आए थे, जिनमें महिला कर्मचारियों से जुड़े दुर्व्यवहार की बात कही गई थी। हालांकि बाद में पोस्ट हटा ली गई। इसके बाद कंपनी ने साफ किया कि वह उत्पीड़न और भेदभाव के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाती है और हर शिकायत की निष्पक्ष जांच की जाती है।