खालिस्तानी आतंकवादी अर्शदीप सिंह गिल्ल उर्फ अर्शदीप दल्ला को कनाडा में गिरफ्तार किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि दल्ला को ओंटारियो प्रांत के मिल्टन शहर में 27-28 अक्तूबर को हुई गोलीबारी के एक मामले में गिरफ्तार किया गया। हालांकि, इसको लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि उसे जेल से रिहा किया गया है या वह अभी भी हिरासत में है। अर्शदीप को हरदीप सिंह निज्जर का सहयोगी माना जाता है, जिसे पिछले साल ब्रिटिश कोलांबिया में अज्ञात हमलावरों में मार गिराया था।
एचआरपीएस ने दो आरोपियों को किया गिरफ्तार
कनाडा की हल्टन रीजनल पुलिस सर्विस (एचआरपीएस) ने पिछले मंगलवार को दो व्यक्तियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी थी। इन दोनों पर हथियार से गोली चलाने का इरादा रखने का आरोप है। पुलिस ने आरोपियों की पहचान का खुलासा नहीं किया है।
लेकिन यह बताया कि दोनों जमानत पर सुनवाई होने तक हिरासत में रहेंगे। सूत्रों के मुताबिक, इन दो में से एक अर्शदीप दल्ला हो सकता है, जो खालिस्तान टाइगर फोर्स (केटीएफ) आतंकी संगठन से जुड़ा हुआ है। अर्शदीप आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर के लिए आतंकी गतिविधियों का संचालन करता था, जिसे पिछले साल जून में मारा गया था।
अर्शदीप के खिलाफ भारत में कई मामलों की चल रही जांच
अर्शदीप दल्ला पर पंजाब में लक्षित हत्याओं, आतंकवाद के लिए पैसा जुटाने और उगाही करने के आरोप हैं। भारत सरकार ने जनवरी 2023 में उसे आतंकवादी घोषित किया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) की एक अधिसूचना के मुताबिक, अर्शदीप भारत में नशीली दवाओं और हथियारों की भारी मात्रा में तस्करी करने में शामिल था।
एनआईए अर्शदीप के खिलाफ विभिन्न मामलों की जांच कर रही है। जिनमें लक्षित हत्याएं, आतंकवाद के लिए धन जुटाना, हत्या का प्रयास और पंजाब में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने जैसी गतिविधियां शामिल हैं। सरकार का मानना है कि दल्ला आतंकवादी गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल है, इसलिए उसे 1967 के गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत आतंकवादी घोषित किया गया।
कनाडा और भारत के बीच इस मामले को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है, क्योंकि दोनों देशों के बीच सभी कूटनीतिक चैनल बंद हैं। सुरक्षा एजेंसियों को गोलीबारी के बारे में जानकारी मिली, जिसमें दल्ला शामिल था। इस बीच, पंजाब पुलिस ने अर्श दल्ला गिरोह के दो शूटरों को गिरफ्तार किया है। ये शूटर एक सिख कार्यकर्ता की हत्या में शामिल थे।