बीजिंग। वेनेजुएला को लेकर की गई सैन्य कार्रवाई पर चीन ने कड़ा रुख अपनाया है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बिना किसी देश का नाम लिए अमेरिका पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि वैश्विक ताकतों को अन्य देशों के विकास के रास्ते का सम्मान करना चाहिए और किसी पर अपनी इच्छा थोपने से बचना चाहिए।
ये टिप्पणी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सोमवार को आयरलैंड के प्रधानमंत्री माइकल मार्टिन के साथ हुई मुलाकात के दौरान की। उनका बयान वेनेजुएला मुद्दे पर वॉशिंगटन की कार्रवाइयों को लेकर चीन की पहले से चली आ रही आलोचनात्मक नीति को और स्पष्ट करता है।
‘दादागिरी से कमजोर हो रही वैश्विक व्यवस्था’
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के हवाले से जारी चीन के विदेश मंत्रालय के बयान में शी जिनपिंग ने कहा कि दुनिया इस समय अभूतपूर्व बदलावों और अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि एकतरफा फैसले और दबाव की राजनीति अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचा रही हैं।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हर देश को यह अधिकार है कि वह अपने नागरिकों द्वारा चुने गए विकास मॉडल पर आगे बढ़े। अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल सिद्धांतों का पालन किया जाना चाहिए और इस दिशा में बड़ी शक्तियों को जिम्मेदार नेतृत्व दिखाना होगा।
वेनेजुएला के साथ चीन के मजबूत रिश्ते
गौरतलब है कि चीन वेनेजुएला से तेल खरीदने वाला सबसे बड़ा देश है। बीजिंग लगातार यह रुख अपनाता रहा है कि वेनेजुएला को बाहरी दबाव से मुक्त होकर अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ आर्थिक सहयोग करने का अधिकार है। पिछले साल नवंबर में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के जन्मदिन पर भेजे गए संदेश में शी जिनपिंग ने दोनों देशों को करीबी मित्र और भरोसेमंद साझेदार बताया था।
उस संदेश में चीन ने वेनेजुएला की संप्रभुता, राष्ट्रीय सुरक्षा, गरिमा और सामाजिक स्थिरता के समर्थन को जारी रखने की प्रतिबद्धता भी दोहराई थी।
अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी निंदा
वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के कुछ ही घंटों बाद चीन के विदेश मंत्रालय ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि एक संप्रभु राष्ट्र के खिलाफ खुले तौर पर बल प्रयोग करना और उसके राष्ट्रपति के खिलाफ कार्रवाई करना बेहद चिंताजनक है। चीन ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताया।
मंत्रालय ने अमेरिका पर वर्चस्ववादी रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा था कि इस तरह के कदम लैटिन अमेरिका और कैरेबियन क्षेत्र की शांति व सुरक्षा को खतरे में डालते हैं। साथ ही चीन ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को जबरन देश से बाहर ले जाने पर गहरी चिंता जताते हुए उनकी तत्काल रिहाई की मांग भी की थी।