भारत और अमेरिका ने अपने द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा साझा की है। यह कदम दोनों देशों के बीच व्यापक व्यापार समझौते की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। केंद्र सरकार के अनुसार इस फ्रेमवर्क से भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बड़े अवसर मिलेंगे, जबकि संवेदनशील कृषि और डेयरी उत्पादों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। समझौते के तहत टैरिफ में कटौती और बाजार तक आसान पहुंच पर सहमति बनी है।

कृषि और डेयरी क्षेत्रों की सुरक्षा
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि समझौते में भारत ने अपने संवेदनशील कृषि और डेयरी उत्पादों की रक्षा की है। इसमें मक्का, गेहूं, चावल, सोया, पोल्ट्री, दूध, चीज, एथेनॉल, तंबाकू, कुछ सब्जियां और मांस उत्पाद शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इससे किसानों और ग्रामीण आजीविका पर कोई नकारात्मक असर नहीं होगा। व्यापार बढ़ाने के साथ-साथ घरेलू हितों की सुरक्षा भी सर्वोच्च प्राथमिकता रही।

अंतरिम व्यापार समझौते का ढांचा
संयुक्त बयान के अनुसार दोनों देश इस समझौते को तुरंत लागू करेंगे और इसे अंतिम रूप देने की दिशा में काम करेंगे। व्हाइट हाउस ने कहा कि यह फ्रेमवर्क दोनों देशों की द्विपक्षीय व्यापार वार्ता के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराता है। यह पहल अमेरिकी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई वार्ता का अगला चरण है। इसका उद्देश्य संतुलित और पारस्परिक लाभ वाला व्यापार तंत्र तैयार करना है।

कौन-कौन लाभान्वित होगा?
पीयूष गोयल के अनुसार इस समझौते से भारतीय निर्यातकों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर के बाजार तक पहुंच खुलेगी। खासकर एमएसएमई, किसान और मछुआरे इससे लाभान्वित होंगे। निर्यात बढ़ने से लाखों नई नौकरियां बनेंगी, जिसमें महिलाओं और युवाओं को बड़ी भूमिका मिलेगी। सरकार का मानना है कि यह समझौता ‘मेक इन इंडिया’ अभियान और निर्यात प्रतिस्पर्धा को और मजबूत करेगा।

कहाँ घटेगा और कहाँ शून्य होगा टैरिफ?

  • अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर अतिरिक्त 25% ड्यूटी हटा देगा।

  • भारतीय उत्पादों पर पारस्परिक टैरिफ 18% तक घटेगी।

  • टेक्सटाइल, परिधान, लेदर, फुटवियर, प्लास्टिक, रबर, ऑर्गेनिक केमिकल, होम डेकोर, आर्टिजन उत्पाद और कुछ मशीनरी को बड़ा लाभ मिलेगा।

  • जेनेरिक दवाएं, रत्न-हीरे और एयरक्राफ्ट पार्ट्स पर टैरिफ शून्य होगा।

  • ऑटो पार्ट्स पर टैरिफ कोटा के हिसाब से मिलेगा।

  • एयरक्राफ्ट पार्ट्स पर छूट दी जाएगी।

भारत की प्रतिबद्धताएं
अमेरिकी कार्यकारी आदेश के अनुसार भारत ने सीधे तौर पर रूसी तेल का आयात रोकने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके बाद भारतीय वस्तुओं पर अतिरिक्त 25% ड्यूटी हटाने का निर्णय लिया गया। यदि भारत भविष्य में फिर से रूसी तेल आयात करता है, तो अमेरिका ड्यूटी लगाने पर विचार कर सकता है। इसके साथ ही अगले 10 वर्षों के लिए रक्षा सहयोग बढ़ाने का भी ढांचा तय किया गया।

भारत अमेरिका से क्या खरीदेगा?
संयुक्त बयान में कहा गया है कि भारत अगले पांच साल में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के उत्पाद खरीदेगा, जिनमें ऊर्जा उत्पाद, विमान और उनके पुर्जे, कीमती धातु, टेक्नोलॉजी उत्पाद और कोकिंग कोल शामिल हैं। दोनों देश डिजिटल व्यापार को बढ़ावा देने और डेटा सेंटर के ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट समेत अन्य टेक उत्पादों के व्यापार को आसान बनाने पर भी सहमत हुए हैं।

संयुक्त बयान में इसे दोनों देशों के बीच साझेदारी का ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया गया है। समझौते से अतिरिक्त बाजार पहुंच, मजबूत सप्लाई चेन और संतुलित व्यापार नियम सुनिश्चित होंगे। लक्ष्य है कि इस अंतरिम समझौते के बाद व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया जाए, जिससे निर्यात, निवेश, तकनीक और रक्षा सहयोग में नई तेजी आए।