बालाघाट। पाकिस्तान की लाहौर सेंट्रल जेल में करीब सात साल बिताने के बाद मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले का युवक प्रसन्नजीत रंगारी आखिरकार अपने वतन लौट आया है। घर पहुंचते ही परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई और माहौल किसी उत्सव से कम नहीं रहा। फिलहाल वह अपनी बड़ी बहन संघमित्रा खोबरागड़े के घर ठहरा हुआ है।
जेल में बिताए दिनों को लेकर प्रसन्नजीत के बयान एक जैसे नहीं हैं। जब उससे पहली बार पूछा गया तो उसने कहा कि वहां उसे आराम से रहने नहीं दिया जाता था और परेशान किया जाता था, लेकिन थोड़ी देर बाद उसने अपनी बात बदलते हुए कहा कि जेल में सब सामान्य था। परिजन और प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक उसकी मानसिक स्थिति पूरी तरह स्थिर नहीं है, इसी वजह से वह अपनी बात स्पष्ट रूप से नहीं रख पा रहा है।
प्रसन्नजीत ने बताया कि जेल में उसे सुबह चाय और रोटी नाश्ते में मिलती थी, जबकि दोपहर के भोजन में सामान्य खाना दिया जाता था। कभी-कभी मटन और चावल भी परोसे जाते थे। वहां वह सफाई से जुड़ा काम करता था।
अपने भारत आने की कहानी बताते हुए उसने कहा कि वह जबलपुर से ट्रेन में बैठकर दिल्ली गया था, लेकिन वहां से वह किस तरह पाकिस्तान पहुंच गया, उसे खुद भी ठीक से याद नहीं है। इतने वर्षों बाद घर लौटने पर परिजन भावुक हैं और उसके स्वस्थ होने की दुआ कर रहे हैं।