ओडिशा के केओंझार जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे देश में चर्चा छेड़ दी है। यहां एक आदिवासी व्यक्ति को अपनी मृत बहन के बैंक खाते से पैसे निकालने के लिए उसकी हड्डियां बैंक के बाहर लेकर पहुंचना पड़ा। इस घटना को लेकर राजनीतिक हलकों से लेकर आम लोगों तक में नाराजगी देखी जा रही है।

बैंक के बाहर रखीं हड्डियां

मामला 27 अप्रैल का बताया जा रहा है, जब मलिपोसी स्थित एक बैंक शाखा के बाहर जीतू मुंडा नामक व्यक्ति ने अपनी बहन की हड्डियां रख दीं। वह अपनी मृत बहन के खाते से 20 हजार रुपये निकालने की कोशिश कर रहा था, लेकिन बैंक की ओर से “फिजिकल प्रेजेंस” यानी व्यक्ति की मौजूदगी की मांग की गई।

कई बार बैंक के चक्कर लगाने के बावजूद जब कोई समाधान नहीं मिला तो मजबूरी में उसे यह कदम उठाना पड़ा। घटना के बाद यह मामला तेजी से सुर्खियों में आ गया।

नवीन पटनायक ने जताई नाराजगी

बीजेडी प्रमुख और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने इस घटना को बेहद अमानवीय और शर्मनाक बताया है। उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर मामले पर कड़ी आपत्ति जताई है।

पटनायक ने कहा कि नियमों का उद्देश्य लोगों की मदद करना होता है, न कि उन्हें अपमानित करना। उन्होंने बैंक द्वारा आरबीआई नियमों के हवाले को भी गलत ठहराया और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।

बैंकिंग व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना ने ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और संगठनों का कहना है कि जरूरतमंद व्यक्ति को उचित मार्गदर्शन और सहयोग नहीं मिला। नियमों के नाम पर मानवीय संवेदनाओं की अनदेखी की गई।

जांच और सुधार की मांग

अब इस मामले में दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने, ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था में सुधार करने और नागरिकों के साथ मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करने की मांग उठ रही है।

घटना के बाद ओडिशा में लोगों में गुस्सा है और यह मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर बहस का विषय बन गया है। केंद्र सरकार के रुख पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।