नई दिल्ली। संसद में किताबों के हवाले से शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा एक कथित अप्रकाशित सैन्य पुस्तक का जिक्र किए जाने के बाद भाजपा ने भी पलटवार किया। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे सदन में कई प्रकाशित और प्रतिबंधित किताबों के कवर लेकर पहुंचे और कांग्रेस पर इतिहास छुपाने का आरोप लगाया। इस मुद्दे पर सदन में हंगामा बढ़ा और कुछ समय के लिए कार्यवाही रोकनी पड़ी।
निशिकांत दुबे ने किन किताबों का किया हवाला?
मीडिया से बातचीत में निशिकांत दुबे ने कई किताबों का नाम लिया, जिनमें नेहरू और गांधी परिवार से जुड़ी किताबें, इमरजेंसी पर लिखी पुस्तकें और मित्रोखिन आर्काइव शामिल हैं। उनका कहना था कि इन पुस्तकों में कांग्रेस शासन, आपातकाल और कथित विदेशी प्रभाव से जुड़े गंभीर आरोप दर्ज हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि कई किताबों पर पहले प्रतिबंध लगाया गया था, लेकिन अब उन पर खुली चर्चा होनी चाहिए।
दुबे ने स्पीकर से भी अनुरोध किया कि “जो छपी हुई किताब है, उसी पर चर्चा हो। संसद में चर्चा होगी तो गांधी-नेहरू परिवार से जुड़े कई तथ्य सामने आएंगे। 50 के दशक में चीन हमसे पीछे था, लेकिन कैसे आगे निकल गया, इसका पूरा इतिहास सामने आना चाहिए।”
किस वजह से शुरू हुआ विवाद?
विवाद की शुरुआत तब हुई जब राहुल गांधी ने संसद में पूर्व सेना प्रमुख की एक अप्रकाशित किताब का हवाला दिया। सत्ता पक्ष ने आपत्ति जताई कि बिना प्रकाशित और बिना अनुमति वाली सामग्री का जिक्र नियमों के खिलाफ है। इसके जवाब में निशिकांत दुबे ने कहा कि उन्होंने केवल प्रकाशित और पहले से प्रतिबंधित किताबों का हवाला दिया है, ताकि उन पर चर्चा हो सके।
सदन में हंगामा क्यों बढ़ा?
जब दुबे किताबों का हवाला देते हुए बोल रहे थे, तब सभापति ने उन्हें बैठने के लिए कहा, लेकिन वे अपनी बात पर अड़े रहे। इस दौरान विपक्ष ने विरोध शुरू कर दिया और शोर-शराबा बढ़ने पर कार्यवाही रोकनी पड़ी। दुबे ने कहा कि बिना छपी किताब का हवाला देना गलत है, जबकि प्रकाशित किताबों पर चर्चा से कोई डर नहीं सकता। उन्होंने स्पीकर से ऐसी पुस्तकों पर बहस कराने की मांग की।
प्रियंका गांधी की आपत्ति
कांग्रेस ने सवाल उठाया कि यदि राहुल गांधी को किसी किताब का हवाला देने से रोका गया, तो भाजपा सांसद कैसे किताबों के कवर दिखा सकते हैं। प्रियंका गांधी ने समान नियम लागू करने की मांग की। निशिकांत दुबे ने जवाब दिया कि अंतर स्पष्ट है—राहुल गांधी ने अप्रकाशित किताब का हवाला दिया, जबकि उन्होंने केवल प्रकाशित और दर्ज किताबों का उल्लेख किया। इस पर संसद में किताबों को लेकर बहस और तीखी हो गई।