कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में आ गए हैं। रविवार को कोलकाता क्लब में आयोजित कलकत्ता डिबेट 2026 के दौरान उन्होंने हिंदुत्व की अवधारणा पर कड़ा हमला बोला। बहस का विषय था— “क्या हिंदू धर्म को हिंदुत्व से संरक्षण की आवश्यकता है?”

इस चर्चा में मणिशंकर अय्यर ने हिंदू धर्म और हिंदुत्व के बीच स्पष्ट भेद रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म एक प्राचीन और महान आध्यात्मिक परंपरा है, जबकि हिंदुत्व एक राजनीतिक सोच है। अय्यर के अनुसार, हिंदुत्व के जरिए समाज में डर और विभाजन की भावना को बढ़ावा दिया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदुत्व की राजनीति के तहत यह धारणा बनाई जाती है कि देश की बहुसंख्यक हिंदू आबादी को अल्पसंख्यक समुदाय से खतरा है। अय्यर ने कहा कि इस सोच के कारण असहिष्णुता और हिंसक घटनाओं को बढ़ावा मिलता है, जिसका असर सामाजिक सौहार्द पर पड़ता है।

पूर्व मंत्री ने कुछ घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि कभी चर्च में आयोजित क्रिसमस कार्यक्रम में शामिल होने पर आदिवासी बच्ची के साथ दुर्व्यवहार होता है, तो कभी सार्वजनिक स्थानों पर क्रिसमस की सजावट हटाई जाती है। उन्होंने दावा किया कि इस तरह की घटनाएं हिंदुत्व की संकीर्ण सोच को दर्शाती हैं।

मणिशंकर अय्यर ने अपने वक्तव्य में विनायक दामोदर सावरकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि सावरकर ने बौद्ध धर्म को हिंदू समाज के लिए चुनौती के रूप में देखा था, जबकि बौद्ध दर्शन अहिंसा और सार्वभौमिकता का संदेश देता है। अय्यर के अनुसार, इस तरह की सोच समाज और देश दोनों के लिए नुकसानदायक है।

उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू धर्म हजारों वर्षों से अनेक उतार-चढ़ाव और संघर्षों के बावजूद बिना किसी राजनीतिक संरक्षण के जीवित रहा है और निरंतर आगे बढ़ता रहा है। अय्यर ने जोर देकर कहा कि गांधी और स्वामी विवेकानंद के मानवतावादी हिंदू दर्शन को किसी राजनीतिक विचारधारा के सहारे की जरूरत नहीं है।

अय्यर के मुताबिक, हिंदू धर्म की आत्मा आध्यात्मिकता, सहिष्णुता और मानव कल्याण में निहित है, जबकि हिंदुत्व एक आधुनिक राजनीतिक अवधारणा है, जो धर्म की मूल भावना से अलग है।