केंद्रीय बजट से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की आर्थिक दिशा और सरकार की प्राथमिकताओं पर बात करते हुए कहा कि भले ही इन दिनों सबकी नजरें बजट पर टिकी हों, लेकिन सरकार का कामकाज केवल बजट तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में सरकार ने “रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म” के रास्ते पर चलते हुए विकास को नई रफ्तार दी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब सुधारों की तेज़ रफ्तार “रिफॉर्म एक्सप्रेस” पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह यात्रा सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि संसद के सभी सदस्यों के सहयोग से संभव हो रही है। सांसदों के सकारात्मक रवैये और समर्थन से देश पुरानी समस्याओं से बाहर निकलकर स्थायी समाधान की ओर बढ़ रहा है।
भारत-यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी भारत की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था, उद्योग और खासकर युवाओं के लिए नए अवसर लेकर आएगा। पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि इससे देश की उत्पादन क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा और मजबूत होगी।
उन्होंने कहा कि मौजूदा आर्थिक तिमाही की शुरुआत उत्साहजनक रही है और आज भारत आत्मविश्वास के साथ वैश्विक मंच पर एक भरोसेमंद शक्ति के रूप में उभर रहा है। भारत-ईयू समझौते को उन्होंने “महत्वाकांक्षी भारत और आकांक्षी युवाओं के भविष्य” से जोड़ा।
देश के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी का पहला चौथाई हिस्सा पूरा हो चुका है और अब अगले चरण की शुरुआत हो रही है। उन्होंने बताया कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए आने वाले 25 साल निर्णायक होंगे और इसी दिशा में अगला बजट एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
प्रधानमंत्री ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का भी उल्लेख किया और कहा कि वह लगातार नौवीं बार बजट पेश करने जा रही हैं, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण का जिक्र करते हुए कहा कि उसमें 140 करोड़ देशवासियों की आकांक्षाएं और युवाओं की उम्मीदें झलकती हैं। पीएम मोदी ने भरोसा जताया कि संसद के सभी सदस्य उस संदेश को गंभीरता से लेकर देशहित में काम करेंगे।