नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल (मोदी 3.0) के पहले मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि मंत्रिमंडल में फेरबदल की तैयारी अंतिम चरण में है। माना जा रहा है कि इस बार कुछ नए चेहरों को मौका मिल सकता है, जबकि कई मौजूदा मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव या उन्हें बाहर किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।

कब हो सकता है मंत्रिमंडल विस्तार?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी कार्यक्रमों को देखते हुए मंत्रिमंडल विस्तार की संभावित तारीखों पर अटकलें लगाई जा रही हैं। राष्ट्रपति का आंध्र प्रदेश दौरा, जापान के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा और प्रधानमंत्री का विदेश दौरा पहले से तय है। ऐसे में राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 5 जुलाई या फिर 11 जुलाई के बाद कभी भी मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है।

इसके अलावा संसद का मानसून सत्र जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होने की संभावना है। ऐसे में सत्र से पहले कैबिनेट विस्तार किए जाने की संभावना भी व्यक्त की जा रही है। इससे पहले वर्ष 2021 में भी मानसून सत्र से ठीक पहले मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल किया गया था।

किन मंत्रियों पर नजर?

सूत्रों के अनुसार, जिन नेताओं को संगठन में नई जिम्मेदारी मिली है या जिनकी संसदीय स्थिति बदली है, उनके मंत्रिपद में बदलाव संभव माना जा रहा है।

इनमें प्रमुख नाम हैं—

  • पंकज चौधरी, जिन्हें उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनाया गया है। "एक व्यक्ति, एक पद" की नीति के तहत उनके मंत्री पद छोड़ने की चर्चा है।

  • रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो चुका है। उन्हें पंजाब की राजनीति में सक्रिय भूमिका देने की संभावना जताई जा रही है।

  • हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया है। ऐसे में उनके मंत्रिपद पर भी फैसला हो सकता है।

  • जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे के बाद उनका स्थान भी खाली माना जा रहा है।

महिलाओं और पिछड़े वर्ग को मिल सकती है प्राथमिकता

भाजपा के हालिया संगठनात्मक बदलावों को देखते हुए माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार में महिलाओं, युवाओं और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को अधिक प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है। उत्तर प्रदेश भाजपा की नई टीम में भी पिछड़े वर्ग और महिलाओं को प्रमुखता दी गई है। माना जा रहा है कि यही रणनीति केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल में भी दिखाई दे सकती है।

चुनावी राज्यों का भी रहेगा असर

अगले वर्ष उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गुजरात, गोवा, हिमाचल प्रदेश और मणिपुर सहित कई राज्यों में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार में इन राज्यों के क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को भी ध्यान में रखा जा सकता है।

वरिष्ठ नेताओं की भूमिका पर भी मंथन

राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि 75 वर्ष की आयु के करीब पहुंच चुके कुछ नेताओं की भूमिका में बदलाव किया जा सकता है। वहीं, बेहतर प्रदर्शन करने वाले मंत्रियों को प्रमोशन या अतिरिक्त जिम्मेदारी मिलने की भी संभावना है।

सचिवों की बैठक भी अहम

इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों और विभागों के सचिवों की बैठक बुलाई है। इस बैठक में 'ईज ऑफ लिविंग', 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस', प्रशासनिक सुधार और सेवा वितरण को बेहतर बनाने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

सूत्रों के मुताबिक, विभिन्न मंत्रालय अपने कार्यों और सुधारों की प्रगति पर प्रस्तुति देंगे। प्रधानमंत्री अधिकारियों के साथ भविष्य के सुधारों की समीक्षा करेंगे और लोगों से जुड़े कार्यों में लंबित मामलों को कम करने पर विशेष जोर दे सकते हैं।

फिलहाल मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। संभावित तारीखों, नए चेहरों और फेरबदल को लेकर चल रही चर्चाएं राजनीतिक सूत्रों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं। अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।