नई दिल्ली: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने ग्रेट निकोबार द्वीप पर प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल सहित बड़ी अवसंरचना परियोजना को मंजूरी दे दी है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि पर्यावरणीय स्वीकृति में पर्याप्त सुरक्षा उपाय शामिल हैं और इसके लिए कोई अतिरिक्त हस्तक्षेप आवश्यक नहीं है।

किन परियोजनाओं को मिली मंजूरी

एनजीटी की पूर्वी जोनल बेंच, जिसकी अध्यक्षता चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव कर रहे थे, ने सोमवार को आदेश जारी किया। इसके तहत परियोजनाओं में शामिल हैं:

  • अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल

  • टाउनशिप और क्षेत्रीय विकास

  • 450 MVA क्षमता वाला गैस और सौर आधारित पावर प्लांट

इससे पहले परियोजना की पर्यावरणीय मंजूरी को चुनौती दी गई थी, जिसमें आईलैंड कोस्टल रेगुलेशन जोन (ICRZ) नियमों का उल्लंघन होने का आरोप था।

एनजीटी का निर्णय

ट्रिब्यूनल ने कहा कि उच्चस्तरीय समिति ने पहले उठाए गए पर्यावरणीय मुद्दों का समाधान कर दिया है। एनजीटी ने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजना राष्ट्रीय और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, लेकिन पर्यावरणीय सुरक्षा पर किसी भी तरह का समझौता स्वीकार्य नहीं है।

पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण पर विशेष ध्यान

एनजीटी ने परियोजना में निम्न संरक्षण उपायों को अनिवार्य किया है:

  • लेदरबैक समुद्री कछुए का संरक्षण

  • निकोबार मेगापोड पक्षी और खारे पानी के मगरमच्छ

  • निकोबार मकाक और रॉबर क्रैब

  • मैंग्रोव पुनर्स्थापन और कोरल ट्रांसलोकेशन

  • शोम्पेन और निकोबारी जनजातियों के हितों की सुरक्षा

साथ ही ट्रिब्यूनल ने तटरेखा पर कटाव या परिवर्तन न होने का निर्देश दिया और रेत वाले समुद्र तट को सुरक्षित रखने पर जोर दिया, क्योंकि यह कछुओं और पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण घोंसला स्थल है।

रणनीतिक और आर्थिक महत्व

ग्रेट निकोबार परियोजना भारत के दीर्घकालिक सामरिक और आर्थिक हितों के लिए अहम मानी जा रही है। द्वीप मलक्का जलडमरूमध्य के पास स्थित है, जो विश्व के व्यस्ततम समुद्री मार्गों में से एक है। परियोजना से भारत को अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा।

रक्षा दृष्टि से भी यह परियोजना महत्वपूर्ण है। विकसित बुनियादी ढांचा भारत को हिंद महासागर में निगरानी और त्वरित सैन्य तैनाती के मामले में सक्षम बनाएगा। आपदा प्रबंधन या आपातकालीन परिस्थितियों में भी द्वीप की रणनीतिक उपयोगिता बढ़ जाती है।

पर्यावरणीय चिंताएं

परियोजना पर कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत कई पर्यावरणविदों ने आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि लाखों पेड़ काटे जा सकते हैं, जिससे जंगल, पक्षी और जीव-जंतु प्रभावित होंगे। इसके अलावा, ग्रेट निकोबार में पाए जाने वाले कोरल रीफ्स पर भी निर्माण कार्य का नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

एनजीटी ने हालांकि संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए परियोजना को मंजूरी दी है और संबंधित प्राधिकरणों को पर्यावरणीय शर्तों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।