नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की आर्थिक प्रगति और वैश्विक भूमिका को लेकर कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर चुका है। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल एक उभरती हुई शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर एक भरोसेमंद और प्रभावशाली साझेदार बन चुका है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का भविष्य आने वाले एक हजार वर्षों की दिशा तय कर रहा है और यही “न्यू इंडिया” की सबसे बड़ी ताकत और वैश्विक भरोसा है।

‘नेशन फर्स्ट’ आज भारत का मूल मंत्र

हाल ही में संपन्न जी-7 शिखर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया के प्रमुख देश अब यह समझने लगे हैं कि भारत की नीति और दृष्टिकोण का आधार “नेशन फर्स्ट” है। उन्होंने कहा कि यह सिद्धांत ही देश के निर्णयों और विकास की दिशा तय करता है।

एक कार्यक्रम में उद्योगपति और जोहो के संस्थापक श्रीधर वेम्बू का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जब उद्यमी राष्ट्रहित को प्राथमिकता देते हैं, तो देश में मजबूत और वैश्विक स्तर के संस्थान विकसित होते हैं। उन्होंने फ्रांस में आयोजित ‘विवाटेक’ का अनुभव साझा करते हुए बताया कि वहां भारतीय स्टार्टअप्स को लेकर यूरोपीय युवाओं में गहरी रुचि देखी गई, जो भारत की बढ़ती तकनीकी ताकत का संकेत है।

नक्सलवाद और सुरक्षा पर सरकार का रुख

प्रधानमंत्री ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लंबे समय तक स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण रही। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले इन इलाकों में विकास की गति बेहद धीमी थी और हिंसा की घटनाएं बड़ी संख्या में सामने आती थीं।

पीएम मोदी ने कहा कि सरकार ने “राष्ट्र प्रथम” की नीति के साथ इन क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास दोनों पर ध्यान केंद्रित किया, जिसके परिणामस्वरूप हालात में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

उन्होंने बताया कि जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाली बड़ी आबादी दशकों तक पिछड़ेपन और हिंसा से प्रभावित रही, लेकिन पिछले वर्षों में विकास योजनाओं के प्रभाव से करोड़ों लोग गरीबी से बाहर आए हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आकांक्षी जिलों और पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अब शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है, जो नए भारत की दिशा और दृष्टि को दर्शाता है।