नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देने की घोषणा होते ही संसद के गलियारों में हलचल बढ़ गई। विपक्ष खास तौर पर इस समय का इंतजार कर रहा था, क्योंकि कांग्रेस पहले ही लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने नहीं देने का मुद्दा राज्य सभा तक ले आई थी।

खरगे की बैठक और विपक्षी रणनीति
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सहयोगी दलों के साथ बैठक कर रणनीति तैयार की। इसके बावजूद, राजग खेमे ने सदन में एकजुटता दिखाते हुए विपक्ष को चुनौती दी। कांग्रेस ने अपने नेता के कथित अपमान का मुद्दा उठाने का प्रयास किया, लेकिन सहयोगी दलों का समर्थन न मिलने से विरोध छह मिनट में सीमित रह गया।

लोकसभा का हाल और राज्य सभा की तैयारी
लोकसभा में विपक्ष द्वारा उत्पन्न परिस्थितियों के कारण पीएम मोदी बुधवार को चर्चा का जवाब देने नहीं पहुंचे थे। इसका असर कांग्रेस के उत्साह पर देखा गया। गुरुवार को जब प्रधानमंत्री ने राज्य सभा में जवाब देने का समय तय किया, तो खरगे ने सुबह ही संकेत दे दिया कि यहां भी पीएम मोदी का विरोध किया जाएगा।

दोपहर तक कांग्रेस के कुछ नेताओं ने साफ कर दिया कि यदि राहुल गांधी को लोकसभा में नहीं बोलने दिया गया तो वे भी राज्य सभा में नारेबाजी करेंगे। इसमें कुछ तृणमूल कांग्रेस सांसद भी शामिल हुए।

सदन में माहौल
संध्या तक परिस्थितियां बदल गईं। पीएम मोदी जब चर्चा का जवाब देने राज्य सभा पहुंचे, तो राजग के सभी सदस्य मौजूद थे। विपक्षी खेमे में कांग्रेस सांसद खरगे सहित उपस्थित थे, लेकिन तृणमूल कांग्रेस के सदस्य नहीं थे।

नारेबाजी और बहिर्गमन
पीएम मोदी के बोलना शुरू करने पर खरगे खड़े हो गए। उनके साथ डीएमके के त्रिची शिवा और सीपीआइ एम के डॉ. जान ब्रिटास ने विरोध जताया। नारेबाजी बढ़ने पर प्रधानमंत्री ने हल्की चुटकी लेते हुए कहा कि “खरगे जी, आप उम्र को देखते हुए बैठकर भी नारे लगा सकते हैं।”

कुछ कांग्रेस सांसद आगे बढ़कर नारे लगाने लगे। कुल मिलाकर छह मिनट बाद अधिकांश सांसद बहिर्गमन कर गए। त्रिची शिवा और ब्रिटास भी चले गए, जबकि शिवसेना के उद्धव गुट की प्रियंका चतुर्वेदी और अन्य सदस्य जैसे संत बलवीर, स्वाति मालीवाल आदि वहीं बने रहे।