बागपत। राज्य महिला आयोग की सदस्य मीनाक्षी भराला ने सोशल मीडिया के बढ़ते दुरुपयोग को किशोरियों के लापता होने की एक बड़ी वजह बताया है। उन्होंने कहा कि इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर बनने वाली फर्जी पहचान और झूठी दोस्ती के कारण कई लड़कियां बहकावे में आ जाती हैं और घर छोड़ देती हैं।

बृहस्पतिवार को विकास भवन सभागार में आयोजित जनसुनवाई के दौरान भराला ने कहा कि अभिभावकों को बेटियों की गतिविधियों पर नजर रखना बेहद जरूरी है। यदि किसी किशोरी के मोबाइल में पासवर्ड लगा हो और वह फोन छिपाकर इस्तेमाल करती हो, तो इसे गंभीर संकेत मानना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के साथ-साथ सोशल मीडिया से सुरक्षित दूरी भी जरूरी है।

बागपत में 14 लड़कियां अब भी लापता
मीडिया से बातचीत में उन्होंने बताया कि जिले में हाल ही में 24 किशोरियों के अपहरण की सूचना मिली थी, जिनमें से 10 को सुरक्षित ढूंढ लिया गया है, जबकि 14 की तलाश अभी जारी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बाकी लड़कियों को भी जल्द बरामद किया जाएगा।

भराला ने कहा कि सोशल मीडिया पर बने अकाउंट्स में अक्सर असली पहचान और फोटो नहीं होती, जिससे लड़कियां आसानी से भ्रमित हो जाती हैं। इस तरह की घटनाएं केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में सामने आ रही हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि परिवार को चाहिए कि बेटियों के मोबाइल में इस्तेमाल होने वाले ऐप्स और संपर्कों पर निगरानी रखें।

किशोरियों के लिए मोबाइल पर नियंत्रण की वकालत
उन्होंने दोहराया कि 14 से 18 वर्ष की उम्र में लड़कियां भावनात्मक रूप से अधिक संवेदनशील होती हैं और जल्दी प्रभावित हो सकती हैं। इसी वजह से उन्होंने पहले भी इस आयु वर्ग के लिए मोबाइल के सीमित उपयोग की बात कही थी, हालांकि उस पर काफी विरोध भी हुआ था।

बड़ौत पुलिस पर सवाल
महिला आयोग की सदस्य ने बड़ौत क्षेत्र की पुलिस कार्यशैली पर असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि सबसे अधिक लापता लड़कियां इसी इलाके से हैं और बरामदगी की रफ्तार भी बेहद धीमी है। इस मुद्दे को वह उच्च पुलिस अधिकारियों के सामने उठाएंगी।

जनसुनवाई में सामने आईं कई शिकायतें
कार्यक्रम के दौरान कई महिलाओं ने अपनी समस्याएं रखीं। एक बुजुर्ग महिला ने आरोप लगाया कि उनकी बहू घर का काम करने से इनकार करती है और दहेज उत्पीड़न के झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देती है। वहीं एक स्टाफ नर्स ने एक कर्मचारी पर अभद्रता और नशीली दवा देकर अपहरण की कोशिश का आरोप लगाया, लेकिन पुलिस कार्रवाई न होने की शिकायत की।

कुल 11 मामलों की सुनवाई के बाद मीनाक्षी भराला ने संबंधित अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए।