कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय बड़ा सियासी हलचल का माहौल बना हुआ है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ने और कुछ सांसदों के रुख को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
सूत्रों के मुताबिक, टीएमसी के कुछ सांसदों के अलग रुख अपनाने की अटकलों ने पार्टी की आंतरिक एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अभी तक किसी भी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है।
किन नामों को लेकर चर्चा तेज
राजनीतिक हलकों में जिन सांसदों के नामों को लेकर चर्चाएं चल रही हैं, उनमें राज्य के कई प्रमुख चेहरे शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें अलग-अलग लोकसभा क्षेत्रों से चुने गए सांसदों के नाम सामने आ रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार जिन नेताओं के नाम चर्चा में हैं, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
शत्रुघ्न सिन्हा (आसनसोल), काकोली घोष दस्तीदार (बारासात), जगदीश चंद्र बसुनिया (कूचबिहार), खलीलुर रहमान (जंगीपुर), यूसुफ पठान (बहरामपुर), अबू ताहिर खान (मुर्शिदाबाद), पार्थ भौमिक (बैरकपुर), बापी हलदार (मथुरापुर), सायनी घोष (जादवपुर), माला रॉय (कोलकाता दक्षिण), मिताली बाग (आरामबाग), दीपक अधिकारी उर्फ देव (घाटाल), कालीपद सोरेन (झाड़ग्राम), जून मालिया (मेदिनीपुर), अरूप चक्रवर्ती (बांकुरा), शर्मिला सरकार (बर्धमान पूर्व), असित कुमार माल (बोलपुर), शताब्दी रॉय (बीरभूम) और रचना बनर्जी (हुगली)।
राजनीतिक माहौल में बढ़ी हलचल
इन नामों के सामने आने के बाद बंगाल की राजनीति में चर्चाओं का बाजार और गर्म हो गया है। विपक्षी खेमे से लेकर राजनीतिक विश्लेषकों तक, हर कोई इस घटनाक्रम को टीएमसी की आंतरिक राजनीति में संभावित बदलाव के संकेत के रूप में देख रहा है।
हालांकि, पार्टी की ओर से अभी तक इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे स्थिति और अधिक रहस्यमय बनी हुई है।