तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद पूर्व सांसद सुष्मिता देव ने बुधवार को दिल्ली में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि सुष्मिता देव ने इसे महज शिष्टाचार भेंट बताते हुए किसी भी तरह की राजनीतिक अटकलों को खारिज कर दिया।

मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि फिलहाल वह सार्वजनिक जीवन से थोड़ा विराम लेना चाहती हैं और आने वाले कुछ दिनों तक उनका कोई राजनीतिक कार्यक्रम तय नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य को लेकर कोई भी निर्णय सोच-समझकर लिया जाएगा और उचित समय आने पर इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।

राजनीति से नहीं, लोगों की सेवा से जुड़ी है प्राथमिकता

सुष्मिता देव ने कहा कि उनका उद्देश्य राजनीति के माध्यम से जनता की सेवा करना है और वह आगे भी इसी दिशा में काम करती रहेंगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में उन्हें फिर से जनप्रतिनिधि के रूप में काम करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल वह स्वतंत्र हैं और किसी राजनीतिक दल से जुड़ी नहीं हैं।

पूर्व सांसद ने बताया कि उनका राजनीतिक जीवन लंबे समय तक कांग्रेस के साथ जुड़ा रहा है और असम से उनका पुराना संबंध है। ऐसे में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात को किसी राजनीतिक संदेश के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

ममता बनर्जी पर टिप्पणी से बचीं

टीएमसी छोड़ने के फैसले और पार्टी नेतृत्व के बारे में पूछे गए सवालों पर सुष्मिता देव ने कोई सीधी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने केवल इतना कहा कि पार्टी छोड़ने का निर्णय सोच-समझकर लिया गया है और इसके पीछे कई कारण हैं, जिन पर वह फिलहाल विस्तार से बात नहीं करना चाहतीं।

उन्होंने कहा कि उनके राजनीतिक सिद्धांत स्पष्टता और निष्ठा पर आधारित हैं। उनका मानना है कि किसी एक दल में रहते हुए दूसरे राजनीतिक मंच के लिए काम करना उचित नहीं है और वह ऐसी स्थिति में नहीं रहना चाहती थीं।

राज्यसभा सीट छोड़ने को बताया नैतिक फैसला

सुष्मिता देव ने राज्यसभा से इस्तीफा देने के फैसले को नैतिक और सैद्धांतिक कदम बताया। उनके मुताबिक, राज्यसभा की सदस्यता उन्हें टीएमसी के समर्थन से मिली थी, इसलिए पार्टी छोड़ने के बाद उस पद पर बने रहना उनके मूल्यों के अनुरूप नहीं होता।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता और जवाबदेही उनके लिए महत्वपूर्ण है। इसी वजह से उन्होंने पार्टी के साथ-साथ राज्यसभा की सदस्यता भी छोड़ने का फैसला किया।

परिवार के साथ समय बिताएंगी

पूर्व सांसद ने बताया कि अगले कुछ दिनों में वह असम जाएंगी और अपने परिवार के साथ समय बिताएंगी। उन्होंने कहा कि वह अपनी मां और बहनों से मुलाकात करेंगी तथा फिलहाल राजनीतिक गतिविधियों से दूरी बनाए रखेंगी। भविष्य की रणनीति और अगले कदमों पर फैसला बाद में लिया जाएगा।