संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में मंगलवार को गंभीर हंगामा देखने को मिला। सांसदों के असंयमित व्यवहार पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कड़ी नाराजगी जताई और सभी सदस्यों से संयम बरतने की अपील की। स्पीकर ने कहा कि संसद लोकतंत्र का सबसे पवित्र मंच है और यहां इस तरह का व्यवहार न केवल अस्वीकार्य है, बल्कि देश की गरिमा को भी ठेस पहुंचाता है।
स्पीकर ने यह भी खुलासा किया कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान जवाब देने से पहले उन्हें जानकारी मिली थी कि कांग्रेस के कुछ सदस्य अप्रत्याशित कदम उठा सकते हैं, इसलिए उन्होंने सदन की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने सदस्यों को याद दिलाया कि संसद केवल बहस का मंच नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा है और इसकी गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
हंगामे के कारण लोकसभा स्थगित
लगातार नारेबाजी और व्यवधान के चलते लोकसभा की कार्यवाही दोपहर तीन बजे तक स्थगित करनी पड़ी। सदन में व्यवस्था बनाए रखने के तमाम प्रयासों के बावजूद हालात काबू में नहीं आ सके।
प्रधानमंत्री के बयान के बिना पारित हुआ धन्यवाद प्रस्ताव
विपक्ष के हंगामे और नारेबाजी के बीच राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित कर दिया गया। खास बात यह रही कि इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परंपरा के अनुसार भाषण नहीं दिया। यह 2004 के बाद पहली बार हुआ है जब संसद में प्रधानमंत्री के भाषण के बिना ही धन्यवाद प्रस्ताव ध्वनि मत से पास हुआ।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्ष के संशोधनों को वोटिंग के लिए रखा, जिन्हें खारिज कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने 28 जनवरी को दिए गए राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पढ़ा और उसे ध्वनि मत से पारित कर दिया। इस बीच विपक्ष लगातार हंगामा करता रहा।