देश में 629 नेशनल हाईवे परियोजनाएं लेट, खराब निर्माण पर 103 ठेकेदारों पर कार्रवाई: गडकरी

HIGHLIGHTS
- देश की 1,191 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में से 629 तय समय-सीमा से पीछे चल रही हैं।
- खराब निर्माण कार्य पर 2023-24 से 2025-26 के बीच 103 ठेकेदारों पर कार्रवाई की गई।
- ड्रोन से ड्रग्स तस्करी के 305 मामलों में पंजाब से 298 केस सामने आए, 460 किलो नशीले पदार्थ जब्त।
नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को राज्यसभा में लिखित जवाब देते हुए बताया कि देश में इस समय चल रही कुल 1,191 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में से 629 परियोजनाएं अपनी निर्धारित समय-सीमा से पीछे चल रही हैं। हालांकि, उन्होंने परियोजनाओं में देरी के कारणों की कोई विशेष जानकारी नहीं दी।
घटिया निर्माण पर 103 ठेकेदारों पर कार्रवाई
एक अन्य प्रश्न के जवाब में केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच खराब निर्माण कार्य के कारण 103 ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट या दंडित किया गया है।
उन्होंने कहा कि राजमार्गों पर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सरकार करीब 52,647 किलोमीटर लंबे चार लेन या उससे अधिक चौड़े राष्ट्रीय राजमार्गों पर एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू कर रही है।
इसके तहत कमांड सेंटर और यूनिफाइड सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म तैयार किए जा रहे हैं। वहीं, एआई टूल्स और ई-डीएआर (विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट) डाटा के आधार पर वर्ष 2023 से 2025 के बीच दुर्घटना संभावित क्षेत्रों के रूप में 6,358 ‘ब्लैक कॉरिडोर’ की पहचान की गई है।
फास्टैग वार्षिक पास का बढ़ा इस्तेमाल
गैर-व्यावसायिक वाहनों जैसे कार, जीप और वैन के लिए 15 अगस्त 2025 से फास्टैग आधारित वार्षिक पास योजना शुरू की गई थी।
वर्ष 2026-27 के लिए 3,075 रुपये का भुगतान कर इस पास को सक्रिय किया जा सकता है। यह पास एक साल या 200 टोल प्लाजा क्रॉसिंग (जो भी पहले हो) तक मान्य रहेगा।
जून 2026 तक 77 लाख से अधिक वार्षिक पास जारी किए जा चुके हैं। इनके माध्यम से 63 करोड़ से ज्यादा लेनदेन हुए हैं। वर्तमान में कार, जीप और वैन के कुल इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह (ईटीसी) लेनदेन में इस वार्षिक पास की हिस्सेदारी करीब 33 प्रतिशत है।
ड्रोन से ड्रग्स तस्करी के मामलों में बढ़ोतरी
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि सीमा पार से नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इसमें पंजाब सबसे ज्यादा प्रभावित सीमावर्ती राज्य के रूप में सामने आया है।
उन्होंने बताया कि ड्रग सिंडिकेट अपनी पहचान छिपाने और वित्तीय लेनदेन को जटिल बनाने के लिए एन्क्रिप्टेड डिजिटल प्लेटफॉर्म, जीपीएस से लैस खेप और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
वर्ष 2025 में देशभर में ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थों की तस्करी के 305 मामले दर्ज किए गए। इनमें से 298 मामले अकेले पंजाब सीमा से जुड़े थे। इस दौरान करीब 460 किलोग्राम नशीले पदार्थ जब्त किए गए, जिनमें 448 किलोग्राम हेरोइन, नौ किलोग्राम मेथामफेटामाइन और तीन किलोग्राम अफीम शामिल है। यह आंकड़े राज्य में बढ़ते ड्रग तस्करी के खतरे को दर्शाते हैं।
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