‘जिस देश से बाबर आया, वहीं से मोदी को सम्मान’, PM के उज्बेकिस्तान अवॉर्ड पर ओवैसी का BJP पर तंज

HIGHLIGHTS
- पीएम मोदी को उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च राजकीय सम्मान मिला।
- असदुद्दीन ओवैसी ने सम्मान को लेकर तंज कसा।
- ओवैसी ने बाबर और फरगना घाटी का जिक्र किया।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उज्बेकिस्तान के सबसे बड़े राजकीय सम्मान से सम्मानित किए जाने के बाद एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस पर तंज कसा है। उज्बेकिस्तान की दो दिवसीय यात्रा के दौरान राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने पीएम मोदी को ‘ओली दराजली दुस्तलिक’ (Oliy Darajali Dustlik) सम्मान प्रदान किया।
यह उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सरकारी पुरस्कार है। सम्मान मिलने के बाद प्रतिक्रिया देते हुए ओवैसी ने उज्बेकिस्तान और बाबर के ऐतिहासिक संबंध का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बाबर का जन्म वर्तमान उज्बेकिस्तान की फरगना घाटी में हुआ था और उसी ने भारत में मुगल साम्राज्य की स्थापना की थी।
‘बाबर जिस देश से भारत आया, उसी ने पीएम को सम्मान दिया’
ओवैसी ने कहा, "मैं बीजेपी को बधाई देता हूं। जिस देश से बाबर भारत आया था, उसी देश ने प्रधानमंत्री को एक अवॉर्ड दिया है। फरगना घाटी उज्बेकिस्तान में है। आजकल प्रधानमंत्री जहां भी जाते हैं, वहां से कोई न कोई अवॉर्ड लेकर ही लौटते हैं। बधाई हो।"
उन्होंने आगे कहा, "आप लोग बाबर के नाम पर कितनी बुरा-भला कहते थे फिर भी उसी देश के लोग अब आपको अवॉर्ड से सम्मानित कर रहे हैं। संघ को इस पर सोचना चाहिए... हमें उम्मीद है कि संघ परिवार के सदस्य और आरएसएस समर्थक अब बाबर के बारे में उस तरह से बात नहीं करेंगे।"
मोहन भागवत के बयान पर भी ओवैसी ने साधा निशाना
असदुद्दीन ओवैसी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयानों पर भी आलोचना की। न्यूयॉर्क में वन वर्ल्ड वन ह्यूमैनिटी कार्यक्रम में भागवत ने कहा था कि इंसानों के बीच कोई अंतर नहीं है और अलग-अलग धार्मिक रास्ते एक ही लक्ष्य की ओर जाते हैं।
ओवैसी ने भागवत के बयान को आरएसएस की पुरानी रणनीति बताया। उन्होंने कहा, "मौजूदा आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने जो कहा है वह आरएसएस की पुरानी चाल है। आरएसएस ने जो बातें लगातार कही हैं उनसे वे कभी इनकार नहीं करेंगे और न ही उन्हें वापस लेंगे।"
ओवैसी ने आगे कहा, "बाहरी दुनिया के लिए दिए जाने वाले भाषणों और अपने सदस्यों के लिए कही जाने वाली बातों में साफ अंतर होता है। यही हमेशा से उनके काम करने का तरीका रहा है।"
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