मनी लॉन्ड्रिंग पर CJI सूर्य कांत का बड़ा बयान, बोले- दुनिया के हर व्यक्ति के लिए लैपटॉप खरीद सकते हैं

HIGHLIGHTS
- कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में आर्थिक अपराध पर आयोजित हुआ 43वां सिम्पोजियम।
- CJI ने डिजिटल अरेस्ट जैसे नए साइबर फ्रॉड मामलों का भी जिक्र किया।
- PMLA और भगोड़े आर्थिक अपराधी अधिनियम का उल्लेख किया गया।
नई दिल्ली। लंदन में आयोजित एक कार्यक्रम में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कहा कि दुनिया में एक साल के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए जितनी रकम इधर-उधर की जाती है, उससे धरती पर मौजूद हर व्यक्ति के लिए एक साधारण लैपटॉप खरीदा जा सकता है और इसके बाद भी पैसा बच जाएगा।
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में इकोनॉमिक क्राइम पर आयोजित 43वें इंटरनेशनल सिम्पोजियम में बोलते हुए चीफ जस्टिस कांत ने कहा कि भारतीय न्यायपालिका ने डिजिटल अरेस्ट स्कैम जैसे नए प्रकार के धोखाधड़ी के मामलों में संसद की कार्रवाई का इंतजार किए बिना तेजी से कदम उठाए हैं।
'दुनिया के सभी लोगों के लिए खरीदे जा सकते हैं लैपटॉप'
उन्होंने कहा, "आज अगर मनी लॉन्ड्रिंग के वैश्विक अनुमान मोटे तौर पर भी सही हैं तो दुनिया एक साल में इतनी रकम लॉन्डर करती है कि उससे धरती पर मौजूद सभी आठ अरब लोगों के लिए एक साधारण लैपटॉप खरीदा जा सकता है और फिर भी कुछ पैसा बच जाएगा।"
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "और गैर-कानूनी तरीके से जमा की गई उस भारी-भरकम दौलत में से सबसे उदार अनुमान के मुताबिक भी सौ में से एक हिस्सा ही वापस मिल पाता है। अगर इसे और सरल भाषा में कहें तो उस संपत्ति के सौ हिस्सों में से 99 हिस्सों का जिक्र सिर्फ भाषणों और रिपोर्टों में होता है, जबकि वास्तव में केवल एक हिस्सा ही बरामद हो पाता है।"
'कैम्ब्रिज किसी को परेशान करने नहीं आया'
उन्होंने आगे कहा, "मैं इन आंकड़ों के जरिए इतनी प्रतिष्ठित सभा को परेशान करने के लिए कैम्ब्रिज नहीं आया हूं, बल्कि इस बात पर जोर देने आया हूं कि इसी वजह से हम सब इस सप्ताह यहां एकत्र हुए हैं।"
भारत के संदर्भ में उन्होंने कहा कि आर्थिक अपराधों से निपटने के लिए देश की प्रतिक्रिया को किसी एक कानून के रूप में नहीं, बल्कि कई दशकों में विकसित किए गए बहु-स्तरीय ढांचे के तौर पर समझना बेहतर होगा। इसमें कानून, संस्थाएं और न्यायिक सिद्धांत अपनी-अपनी अलग भूमिका निभाते हैं। चीफ जस्टिस कांत ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 और भगोड़े आर्थिक अपराधी अधिनियम (Fugitive Economic Offenders Act), 2018 का भी उल्लेख किया।
'पीएमएलए प्रक्रिया के दुरुपयोग के आरोप'
उन्होंने कहा, "मुझे यह भी बताना होगा कि ये तरीके पूरी तरह अचूक नहीं हैं। कई लोगों ने जांच एजेंसियों पर पीएमएलए प्रक्रिया के गलत इस्तेमाल के आरोप लगाए हैं। इनमें बिना ठोस कारण बताए गिरफ्तारी और मौजूदा परिस्थितियों में जरूरी अवधि से अधिक समय तक हिरासत में रखने जैसे आरोप शामिल हैं। ऐसे मामलों में न्यायपालिका ने स्थिति सुधारने के लिए हस्तक्षेप किया है।"
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया है कि गिरफ्तारी के कारण आरोपी को केवल पढ़कर सुनाने के बजाय लिखित रूप में दिए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि दशकों से सुप्रीम कोर्ट का जोर इस बात पर रहा है कि उचित प्रक्रिया और निर्दोष होने की धारणा उसके न्यायशास्त्र के मार्गदर्शक सिद्धांत बने रहें।
चीफ जस्टिस कांत ने कहा कि गैर-कानूनी संपत्ति और आर्थिक अपराध की प्रकृति ऐसी है कि वे उस संप्रभुता का सम्मान नहीं करते, जो कानूनी ढांचों को विदेशी हस्तक्षेप से बचाती है। उन्होंने कहा, "इस संगोष्ठी का जवाब यह होना चाहिए कि सतर्कता, सहयोग और कानून का शासन धोखाधड़ी को समान रूप से और मुझे उम्मीद है कि और भी मजबूती से रोकते हैं।"
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