अमित शाह का उत्तर बंगाल दौरा, सिलीगुड़ी गलियारे और सीमावर्ती इलाकों की सुरक्षा पर नजर

HIGHLIGHTS
- अमित शाह करीब एक महीने में दूसरी बार उत्तर बंगाल पहुंचे हैं।
- तीन दिवसीय दौरे में सीमा सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रम होंगे।
- 21 अगस्त को सशस्त्र सीमा बल के सीमांत मुख्यालय में कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।
अरुणाचल प्रदेश के ताक्सिंग से लेकर सिलीगुड़ी तक पूर्वी भारत का सुरक्षा परिदृश्य कई स्तरों में बंटा हुआ है। इसी संवेदनशील क्षेत्र के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार को करीब एक महीने में दूसरी बार उत्तर बंगाल पहुंचे। अपने तीन दिवसीय दौरे के दौरान वह सीमा सुरक्षा को लेकर उच्चस्तरीय बैठकें करेंगे, सीमावर्ती क्षेत्रों की समीक्षा करेंगे और सशस्त्र सीमा बल के जवानों से संवाद करेंगे। नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से लगी सीमाओं के साथ सिलीगुड़ी गलियारा भी केंद्र के सुरक्षा एजेंडे में प्रमुखता से शामिल है।
बागडोगरा पहुंचने के बाद अमित शाह सुकना के लिए रवाना हुए। 21 अगस्त को सशस्त्र सीमा बल के सीमांत मुख्यालय में सीमा सुरक्षा परियोजनाओं से जुड़े कार्यक्रम आयोजित होंगे। वहीं, 22 अगस्त को विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों और राज्य प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक प्रस्तावित है।
सिलीगुड़ी क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
सिलीगुड़ी गलियारा देश के बाकी हिस्सों को पूर्वोत्तर से जोड़ने वाली अहम स्थलीय कड़ी है। इसके आसपास नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाएं स्थित हैं। ऐसे में यहां सुरक्षा में किसी बड़ी चूक का असर केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूर्वोत्तर की सैन्य, नागरिक और आर्थिक संपर्क व्यवस्था तक पहुंच सकता है।
केवल घुसपैठ नहीं, कई मोर्चों पर निगरानी
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, पूर्वी सीमा पर केंद्र का ध्यान अब बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था पर है। इसका मकसद अवैध घुसपैठ के अलावा तस्करी, हथियारों और मादक पदार्थों की आवाजाही, मानव तस्करी, सीमा पार अपराध और संवेदनशील इलाकों में होने वाली किसी भी असामान्य गतिविधि का शुरुआती स्तर पर पता लगाना है।
आंकड़ों में पूर्वी सुरक्षा की तस्वीर
- तीन सीमाएं- नेपाल, भूटान और बांग्लादेश
- आठ राज्य- पूर्वोत्तर की मुख्य भूमि से संपर्क सिलीगुड़ी गलियारे पर निर्भर
- भारत-बांग्लादेश सीमा पर 1,647.696 किमी बाड़ लग चुकी
रणनीति में सीमा बाड़ के साथ सड़क और सीमा चौकियां, तकनीकी निगरानी, खुफिया सूचनाओं का साझा इस्तेमाल और केंद्र व राज्य की एजेंसियों के बीच तत्काल समन्वय शामिल है। गृह मंत्रालय की सीमा प्रबंधन नीति में भी बाड़, सड़क, सीमा चौकियों और तकनीकी प्रणालियों को एकीकृत सुरक्षा ढांचे का हिस्सा बनाया गया है।
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