आठ राज्यों में डीएम को मिला नागरिकता देने का अधिकार, केंद्र ने सख्त किए नियम

HIGHLIGHTS
- गृह मंत्रालय ने नागरिकता (तीसरा संशोधन) नियम, 2026 अधिसूचित किए।
- गुजरात, राजस्थान, पंजाब, बंगाल, असम और त्रिपुरा के जिलाधिकारियों को अधिकार मिला।
- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भी डीएम नागरिकता आवेदनों पर कार्रवाई करेंगे।
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को गुजरात, राजस्थान, पंजाब, बंगाल, असम और त्रिपुरा (आदिवासी इलाकों को छोड़कर) के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में जिलाधिकारियों (डीएम) को भारत के बाहर जन्मे पात्र और उपयुक्त आवेदकों को नागरिकता देने का अधिकार दिया है, जो सामान्य रूप से इन क्षेत्रों में रह रहे हैं।
सरकार ने बुधवार को नागरिकता (तीसरा संशोधन) नियम, 2026 की अधिसूचना जारी की। इसके तहत इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जिलाधिकारियों को पंजीकरण या नेचुरलाइजेशन के माध्यम से नागरिकता के लिए आने वाले आवेदनों पर कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है।
अधिसूचित नियमों के अनुसार, जिलाधिकारी आवेदक की उपयुक्तता से संतुष्ट होने के बाद यह तय करेंगे कि वह पंजीकरण या नेचुरलाइजेशन के लिए पात्र और उपयुक्त है या नहीं। इसके बाद जिलाधिकारी उसे भारत की नागरिकता प्रदान करेंगे।
इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जिलाधिकारी उन अधिकार प्राप्त समितियों और जिला स्तरीय समितियों की जगह लेंगे, जिन्हें पहले नागरिकता से जुड़े ये अधिकार प्राप्त थे।
सरकार ने निर्देश दिया है कि संबंधित क्षेत्रों में अधिकार प्राप्त समितियों या जिला स्तरीय समितियों के पास लंबित सभी आवेदनों को तत्काल संबंधित जिलाधिकारियों को स्थानांतरित किया जाए। नए नियमों में आवेदकों के लिए खुद उपस्थित होने की शर्त भी रखी गई है।
नियमों के मुताबिक, यदि उचित अवसर दिए जाने के बावजूद कोई आवेदक आवेदन पर हस्ताक्षर करने और निष्ठा की शपथ लेने के लिए खुद उपस्थित नहीं होता है, तो कलेक्टर आवेदन को खारिज कर देगा।
सरकार ने पिछले आदेशों को भी रद्द कर दिया है। हालांकि, उन आदेशों के रद्द होने से पहले किए गए या नहीं किए गए कार्यों को इससे अलग रखा गया है।
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