1971 युद्ध के वीर ब्रिगेडियर बसंत कुमार पंवार का निधन, जंगल वारफेयर के थे शिल्पकार

HIGHLIGHTS
- 1971 भारत-पाक युद्ध के योद्धा और जंगल युद्ध प्रणाली के विशेषज्ञ ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) बसंत कुमार पंवार का महू में निधन।
- पंवार ने सेना में 36 साल सेवा दी और मिजोरम व छत्तीसगढ़ में काउंटर इंसर्जेंसी अभियानों में अहम भूमिका निभाई।
- छत्तीसगढ़ में काउंटर टेररिज्म एंड जंगल वारफेयर कॉलेज की स्थापना में उनका विशेष योगदान रहा।
1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के योद्धा और नक्सली उग्रवाद के खिलाफ देश में आधुनिक जंगल युद्ध प्रणाली के शिल्पकार रहे ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) बसंत कुमार पंवार का महू में निधन हो गया। बुधवार को उनके परिजनों ने इसकी जानकारी दी। 77 वर्षीय पंवार के दो पुत्र हैं, जो वर्तमान में भारतीय सेना में सेवा दे रहे हैं।
1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान युवा अधिकारी के रूप में बसंत कुमार पंवार ने सीमा पार अभियानों में हिस्सा लिया था। उन्होंने मुक्ति वाहिनी के लड़ाकों के साथ मिलकर कई घात लगाकर हमलों का नेतृत्व किया और ढाका की ओर बढ़ने वाले अभियान में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद उन्होंने भारतीय सेना के साथ-साथ मिजोरम और छत्तीसगढ़ पुलिस बलों में पांच दशक से अधिक समय तक देश की सुरक्षा के लिए सेवाएं दीं।
इंदौर में हुआ था जन्म
3 मार्च 1949 को इंदौर में जन्मे बसंत कुमार पंवार दिसंबर 1969 में मराठा लाइट इन्फैंट्री की पहली बटालियन में कमीशंड अधिकारी बने। 1971 के युद्ध के दौरान 95 माउंटेन ब्रिगेड के तहत सेवा देते हुए उन्होंने कमालपुर और बक्शीगंज में दुश्मन के ठिकानों पर हमलों का नेतृत्व किया।
इसके बाद उन्होंने ऐतिहासिक टंगाइल पैराड्रॉप अभियान में महत्वपूर्ण संपर्क अधिकारी की भूमिका निभाई। अपने 36 वर्षों के सैन्य करियर में उन्होंने 1 मराठा लाइट इन्फैंट्री की कमान संभाली और मिजोरम के वैरेंगटे स्थित सेना के काउंटर इंसर्जेंसी एंड जंगल वारफेयर स्कूल (सीआईजेडब्ल्यूएस) के कमांडेंट रहे।
वर्ष 2004 में उन्होंने पहले भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य अभ्यास 'युद्ध अभ्यास' की निगरानी भी की। उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें अति विशिष्ट सेवा पदक (एवीएसएम) और विशिष्ट सेवा पदक (वीएसएम) से सम्मानित किया गया।
छत्तीसगढ़ में विशेष योगदान, रमन सिंह ने दी श्रद्धांजलि
सेना से सेवानिवृत्ति के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने उन्हें पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) नियुक्त किया था। अगस्त 2005 में उन्होंने उत्तर बस्तर के कांकेर में काउंटर टेररिज्म एंड जंगल वारफेयर कॉलेज (सीटीजेडब्ल्यूसी) की स्थापना की।
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने ब्रिगेडियर पंवार के निधन पर शोक व्यक्त किया और कांकेर स्थित काउंटर टेररिज्म एंड जंगल वारफेयर कॉलेज में प्रशिक्षक के रूप में उनके योगदान को याद किया।
उन्होंने कहा कि जंगल युद्ध में जवानों को दक्ष बनाने और सुरक्षा बलों को मजबूत करने में ब्रिगेडियर पंवार का योगदान हमेशा याद किया जाएगा। वहीं छत्तीसगढ़ पुलिस ने भी अपने संदेश में कहा कि राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में उनका योगदान अविस्मरणीय है।
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