वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस पर बरसे बृजभूषण शरण सिंह, बोले- बहुसंख्यक समाज को ठेस पहुंचाती है पार्टी

HIGHLIGHTS
- बृजभूषण शरण सिंह ने नवाबगंज स्थित आवास पर जनसुनवाई की।
- मीडिया से बातचीत में कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाए।
- कांग्रेस ने ‘वंदे मातरम’ के पहले दो पद गाने की परंपरा दोहराई।
दिल्ली से लौटने के बाद बृहस्पतिवार को कैसरगंज के पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने नवाबगंज के विश्नोहरपुर स्थित अपने आवास पर जनसुनवाई की। जनसुनवाई के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने वंदे मातरम के मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा।
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि कांग्रेस और उसके नेता ऐसे काम करते हैं, जो देश के बहुसंख्यक समाज को बुरा लगे। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से सवाल किया कि यदि 1937 की बात की जा रही है तो उसके बाद 1947 में देश का विभाजन किस आधार पर हुआ, इस पर भी चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का रास्ता स्पष्ट नहीं है और वह ऐसे मुद्दों पर रुख अपनाती है, जिससे बहुसंख्यक समाज को ठेस पहुंचती है।
कांग्रेस ने स्पष्ट किया- केवल दो पद ही गाएगी
कांग्रेस ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि पार्टी ‘वंदे मातरम’ के केवल पहले दो पद गाने की अपनी परंपरा पर कायम रहेगी। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पार्टी स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा तय किए गए रास्ते पर चलेगी, न कि केंद्र सरकार के नए प्रोटोकॉल के मुताबिक। वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने आरोप लगाया कि मुसलमानों के प्रति नफरत की वजह से ‘वंदे मातरम’ के पूरे पाठ को अनिवार्य किया गया है।
1937 के फैसले को कांग्रेस ने फिर दोहराया
कांग्रेस का यह रुख कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के उस प्रस्ताव के एक दिन बाद सामने आया, जिसमें 1937 में लिए गए फैसले को दोहराया गया है। उस समय CWC ने तय किया था कि कांग्रेस के कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के सिर्फ पहले दो पद ही गाए जाएंगे। यह फैसला ऐसे समय में चर्चा में है, जब केंद्र सरकार ने हाल ही में राष्ट्रगीत के पूर्ण गान को आधिकारिक प्रोटोकॉल का हिस्सा बनाया है।
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