आजम खान के जौहर विश्वविद्यालय की फंडिंग पर ED की जांच, ठेकेदार ने किए अहम खुलासे

HIGHLIGHTS
- ईडी ने ट्रस्ट के दानदाताओं की सूची की जांच शुरू की
- एक ठेकेदार ने 150 करोड़ रुपये के ठेके मिलने की बात कही
- ठेके की 30-40 फीसदी रकम निर्माण सामग्री पर खर्च करने का दावा
आजम खान का जौहर विश्वविद्यालय उनके मंत्री रहते हुए दिए गए ठेकों से मिली रिश्वत की रकम से बनाए जाने का दावा किया गया है। ईडी की जांच में इसका खुलासा होने की बात सामने आई है।
एक ठेकेदार ने ईडी को दिए बयान में बताया कि ठेके की 30 से 40 फीसदी रकम जौहर विश्वविद्यालय के लिए निर्माण सामग्री खरीदने में खर्च की गई।
मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट ने 2025-26 के आयकर रिटर्न में विश्वविद्यालय की संपत्ति 94.33 करोड़ रुपये बताई है। वहीं, अधिकारियों ने विश्वविद्यालय के 59 भवनों के निर्माण पर 494.46 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया है। ईडी के अनुसार आजम खान ट्रस्ट के आजीवन अध्यक्ष हैं।
ठेके की रकम से जौहर विश्वविद्यालय बनाने का आरोप
सूत्रों के अनुसार, 2012 से 2017 के बीच सपा सरकार में आजम खान कैबिनेट मंत्री के साथ-साथ यूपी जल निगम के अध्यक्ष भी थे। इस दौरान रामपुर के ठेकेदारों को कई ठेके दिए गए।
आरोप है कि इन ठेकेदारों ने ठेके के बदले मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को दान दिया। इसके अलावा असली ठेके वाली जगह के बजाय निर्माण सामग्री जौहर विश्वविद्यालय तक पहुंचाई गई।
ईडी अब ट्रस्ट को दान देने वाले सभी लोगों की सूची की जांच कर रही है और उनसे पूछताछ की जा रही है। बुधवार को छापेमारी के दौरान ऐसे ही एक ठेकेदार से पूछताछ कर उसका बयान दर्ज किया गया।
ठेकेदार ने अपने बयान में बताया कि 2013-14 से 2017-18 के बीच आजम खान के प्रभाव के कारण उसे 150 करोड़ रुपये के ठेके मिले। उसके मुताबिक, इस रकम का 30 से 40 फीसदी हिस्सा जौहर विश्वविद्यालय के लिए निर्माण सामग्री खरीदने में खर्च किया गया।
आयकर विभाग की जांच में भी सामने आई बात
आयकर विभाग की जांच में भी इस बात की पुष्टि होने का दावा किया गया है कि उस दौरान ठेकेदारों ने ठेकों की बड़ी रकम जौहर विश्वविद्यालय तक पहुंचाई।
ईडी की जांच में एक ऐसी कंपनी का भी पता चला, जिसे 2025 में उत्तर प्रदेश जल निगम से कंस्ट्रक्शन और डिजाइन का 1.98 करोड़ रुपये का काम मिला था। इसके बाद कंपनी ने जौहर ट्रस्ट को 50 लाख रुपये ट्रांसफर किए।
इसी तरह 25 करोड़ रुपये का ठेका हासिल करने वाली एक कंपनी ने ट्रस्ट को 40 लाख रुपये का दान दिया।
ईडी के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, बुधवार को दिल्ली, रामपुर और सहारनपुर में हुई छापेमारी के दौरान जौहर ट्रस्ट की फंडिंग से जुड़े कई अहम दस्तावेज मिले हैं। इन सभी दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, ईडी का प्रयास जौहर विश्वविद्यालय को मिली पूरी फंडिंग के मूल स्रोत का पता लगाना है। इसमें निर्माण सामग्री के जरिए मिली मदद और ट्रस्ट को दिए गए दान, दोनों की जांच की जा रही है।
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