एपस्टीन कनेक्शन से घिरे ब्रिटिश पीएम स्टार्मर, कुर्सी पर संकट

लंदन। दिवंगत यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े पुराने संबंधों की परछाईं अब अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर साफ दिखाई देने लगी है। ब्रिटेन में इस मामले ने ऐसा तूल पकड़ा है कि प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की कुर्सी तक खतरे में आ गई है। हालात तब और गंभीर हो गए, जब उनके चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी ने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद लेबर पार्टी के भीतर ही स्टार्मर के नेतृत्व को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
सोमवार को प्रधानमंत्री स्टार्मर ने अपनी ही पार्टी के सांसदों को समझाने की कोशिश की कि उनका कार्यकाल अभी बहुत छोटा रहा है और इस आधार पर नेतृत्व परिवर्तन की मांग करना जल्दबाजी होगी। हालांकि, पार्टी के भीतर असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है और कई सांसद खुलकर नेतृत्व पर पुनर्विचार की बात करने लगे हैं।
इस संकट की जड़ वाशिंगटन में पूर्व ब्रिटिश राजदूत पीटर मैंडेलसन और जेफ्री एपस्टीन के बीच सामने आए संबंधों से जुड़ी है। इन खुलासों के बाद से ही स्टार्मर की राजनीतिक साख पर सवाल उठने लगे थे। स्थिति उस वक्त और बिगड़ गई जब रविवार को चीफ ऑफ स्टाफ मैकस्वीनी ने इस्तीफा देते हुए स्वीकार किया कि मैंडेलसन की नियुक्ति को लेकर उन्होंने स्वयं प्रधानमंत्री को सलाह दी थी और इसकी जिम्मेदारी वे लेते हैं।
लेबर पार्टी की वरिष्ठ सांसद एमिली थॉर्नबेरी ने कहा कि मैकस्वीनी अब विवादों का केंद्र बन चुके थे और उनके जाने से पार्टी को नए सिरे से शुरुआत करने का मौका मिलेगा। इसी बीच जनमत सर्वेक्षणों में लेबर पार्टी के धुर दक्षिणपंथी रिफॉर्म यूके पार्टी से पीछे रहने के संकेत भी पार्टी नेतृत्व पर दबाव बढ़ा रहे हैं। विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी की नेता केमी बैडेनोच ने भी सरकार पर गलत नीतिगत फैसलों का आरोप लगाकर हमला तेज कर दिया है।
2024 की नियुक्ति से उपजा विवाद
प्रधानमंत्री स्टार्मर के लिए मौजूदा संकट की नींव 2024 में रखी गई थी, जब उन्होंने पीटर मैंडेलसन को देश के सबसे अहम राजनयिक पदों में से एक पर नियुक्त किया। यह फैसला उस समय लिया गया, जब एपस्टीन से जुड़े उनके पुराने संबंध सार्वजनिक जानकारी में थे। वर्ष 2008 में नाबालिग से जुड़े यौन अपराध में दोषसिद्धि के बावजूद एपस्टीन से संपर्क बनाए रखने के तथ्य अब पार्टी के भीतर असहजता पैदा कर रहे हैं। कई लेबर सांसदों का मानना है कि नियुक्ति से पहले अधिक सतर्कता बरती जानी चाहिए थी और आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े और खुलासे हो सकते हैं।
मैकस्वीनी के इस्तीफे के बाद बढ़ी बेचैनी
मैंडेलसन को पद से हटाए जाने के बाद मैकस्वीनी ने रविवार को इस्तीफा सौंपते हुए कहा कि उन्होंने ही उस नियुक्ति की सिफारिश की थी। वर्ष 2020 में स्टार्मर के पार्टी नेता बनने के बाद से मैकस्वीनी उनके सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाते थे। जुलाई 2024 के चुनावों में लेबर पार्टी की जीत की रणनीति तैयार करने में उनकी अहम भूमिका मानी जाती है। उनके जाने के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर सवाल और तेज हो गए हैं।
बंद कमरे में सांसदों से बातचीत
प्रधानमंत्री ने सोमवार को लेबर पार्टी के सांसदों के साथ बंद कमरे में बैठक की। हालांकि, इस बैठक में क्या चर्चा हुई, इसका विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। इससे पहले स्टार्मर ने मैंडेलसन से जुड़े दावों पर भरोसा करने को लेकर सार्वजनिक रूप से खेद जताया था और नियुक्ति से संबंधित दस्तावेज सामने लाने का वादा किया था।
सरकार का कहना है कि इन दस्तावेजों से यह स्पष्ट होगा कि क्या मैंडेलसन ने अधिकारियों को एपस्टीन से अपने संबंधों के बारे में गुमराह किया था। अमेरिका में सामने आए रिकॉर्ड के अनुसार, करीब 15 साल पहले एपस्टीन को संवेदनशील सरकारी जानकारी दिए जाने के आरोप भी चर्चा में हैं, जिन पर कड़ी सजा का प्रावधान है। हालांकि, अब तक मैंडेलसन पर न तो कोई आपराधिक आरोप तय हुए हैं और न ही उन्हें गिरफ्तार किया गया है।
बिना आम चुनाव बदला जा सकता है प्रधानमंत्री
ब्रिटेन की संसदीय व्यवस्था में आम चुनाव के बिना भी प्रधानमंत्री बदले जा सकते हैं। यदि स्टार्मर इस्तीफा देते हैं या पार्टी के भीतर उन्हें चुनौती मिलती है, तो लेबर पार्टी में नेतृत्व चुनाव होगा और विजेता नया प्रधानमंत्री बनेगा। इससे पहले कंजर्वेटिव पार्टी ने 2019 से 2024 के बीच तीन प्रधानमंत्री बदले थे। उनमें से लिज ट्रस का कार्यकाल केवल 49 दिन का रहा था। स्टार्मर ने सत्ता संभालते समय राजनीतिक अस्थिरता खत्म करने का वादा किया था, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम ने उनके नेतृत्व को कठिन दौर में ला खड़ा किया है।
नॉर्वे में भी असर
एपस्टीन से जुड़े विवाद का असर नॉर्वे तक पहुंच गया है। नॉर्वे की राजदूत मोना जूल ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वह पहले जॉर्डन में देश की राजदूत थीं और 1990 के दशक में इस्राइल-फलस्तीन शांति प्रयासों से जुड़ी रही हैं। विदेश मंत्रालय ने उनके इस्तीफे की घोषणा उन्हें पद से निलंबित किए जाने के कुछ दिनों बाद की।
यह कार्रवाई उन रिपोर्टों के बाद हुई, जिनमें दावा किया गया था कि एपस्टीन ने 2019 में अपनी मौत से पहले बनाई गई वसीयत में जूल और उनके पति टेर्जे रोड-लार्सन के बच्चों के लिए बड़ी धनराशि छोड़ी थी। नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ ईडे ने कहा कि यह फैसला आवश्यक था और दोषी यौन अपराधी से जुड़ा संपर्क गंभीर निर्णयात्मक चूक को दर्शाता है।
मोना जूल ने सफाई देते हुए कहा कि एपस्टीन से उनका संपर्क सीमित और निजी था। वहीं, नॉर्वे का विदेश मंत्रालय उस थिंक टैंक को दी गई फंडिंग की भी समीक्षा कर रहा है, जिससे रोड-लार्सन जुड़े रहे हैं। मंत्रालय का कहना है कि मामले की पूरी जांच जारी रहेगी, ताकि सभी पहलुओं को स्पष्ट किया जा सके।
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