ईरान पर अमेरिका का भीषण हमला, एयर डिफेंस सिस्टम समेत सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना; होर्मुज में बढ़ा तनाव

HIGHLIGHTS
- अमेरिका-ईरान तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास सैन्य कार्रवाई और हमलों के दावे सामने आए हैं।
- रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका ने ईरानी मिसाइल, हवाई रक्षा प्रणालियों और नौसैनिक ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है।
- ईरान ने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपने नियंत्रण और मार्ग बंद होने की बात कही है।
पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर गहराता नजर आ रहा है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर हवाई कार्रवाई की है। रिपोर्ट में एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के हवाले से दावा किया गया है कि इन हमलों में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की मिसाइल और हवाई रक्षा प्रणालियों के साथ-साथ छोटी तेज रफ्तार नौकाओं को भी निशाना बनाया गया।
बंदर अब्बास और केशम में धमाकों की खबर
ईरानी समाचार एजेंसी फार्स के अनुसार, रविवार को दक्षिणी ईरान के बंदरगाह शहर बंदर अब्बास के पूर्वी हिस्से और केशम द्वीप के आसपास कई जोरदार धमाकों की आवाज सुनी गई। हालांकि, इन धमाकों के कारणों को लेकर अभी तक ईरानी अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
कुवैत ने भी हमले का दावा किया
इस बीच कुवैत ने भी अपने क्षेत्र में हमले की जानकारी दी है। कुवैत के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, देश के तीन उत्तरी सीमा केंद्रों को निशाना बनाया गया, जिससे नुकसान हुआ है।
मंत्रालय ने यह भी बताया कि समुद्री क्षेत्र में कुवैत ऑयल कंपनी के एक तेल ड्रिलिंग प्लेटफॉर्म पर ड्रोन से हमला किया गया। इस घटना में वहां काम कर रहा एक कर्मचारी घायल हुआ है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका-ईरान आमने-सामने
तनाव की मुख्य वजह होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दोनों देशों के अलग-अलग दावे हैं। अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने कहा है कि यह अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पूरी तरह खुला है और जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी है। अमेरिका ने कहा कि उसकी सेना समुद्री मार्ग की सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए तैनात है।
वहीं, ईरान ने अमेरिकी दावे को खारिज करते हुए कहा है कि जलडमरूमध्य फिलहाल बंद है और इस पर उसका नियंत्रण है। ईरान की पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (PGSA) ने दावा किया कि क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों के कारण इस रास्ते से गुजरना संभव नहीं है।
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